लोकसभा में बृजमोहन अग्रवाल ने उठाया PDS बायोमेट्रिक का मुद्दा, केंद्र ने कहा- तकनीकी कारणों से नहीं रुकेगा राशन
लोकसभा में सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बायोमेट्रिक और नेटवर्क संबंधी समस्याओं का मुद्दा उठाया। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया कि तकनीकी खामियों के कारण किसी भी पात्र लाभार्थी का राशन नहीं रोका जाएगा। इसके लिए आधार OTP, IRIS, मल्टी-फिंगर और ऑफलाइन e-POS जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर l संसद के मानसून सत्र में रायपुर लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) में बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और नेटवर्क संबंधी तकनीकी समस्याओं का मुद्दा लोकसभा में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों और दूसरे राज्यों में काम करने वाले प्रवासी श्रमिकों को राशन वितरण में आने वाली परेशानियों की ओर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया।
सांसद ने कहा कि कई बार इलेक्ट्रॉनिक पॉइंट ऑफ सेल (e-POS) मशीनों में बायोमेट्रिक फेल होने, सर्वर डाउन रहने या इंटरनेट कनेक्टिविटी कमजोर होने के कारण पात्र हितग्राहियों को समय पर राशन नहीं मिल पाता। उन्होंने सरकार से पूछा कि ऐसी परिस्थितियों में लाभार्थियों के लिए क्या वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध है और वन नेशन वन राशन कार्ड (ONORC) योजना के तहत दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के हितों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जा रही है।
इस पर उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण राज्य मंत्री निमुबेन जयंतीभाई बांभणिया ने लोकसभा में जवाब देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने राशन वितरण को बाधित होने से बचाने के लिए कई वैकल्पिक प्रमाणीकरण व्यवस्थाएं लागू की हैं। अब लाभार्थी फिंगरप्रिंट के अलावा मल्टी-फिंगर, आईआरआईएस (आंखों की पुतली) स्कैन और आधार OTP के माध्यम से भी प्रमाणीकरण कर राशन प्राप्त कर सकते हैं।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि परिवार के किसी एक सदस्य का बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं हो पाता है, तो उसी राशन कार्ड से जुड़े किसी अन्य पात्र सदस्य के प्रमाणीकरण के आधार पर खाद्यान्न दिया जा सकता है। विशेष परिस्थितियों के लिए नामित व्यक्ति (Nominee) की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
केंद्र सरकार ने बताया कि नेटवर्क की समस्या वाले क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए e-POS मशीनों को ऑफलाइन मोड में भी संचालित करने की व्यवस्था की गई है, ताकि इंटरनेट उपलब्ध नहीं होने पर भी राशन वितरण प्रभावित न हो। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि तकनीकी खराबी, नेटवर्क समस्या या कमजोर बायोमेट्रिक के कारण किसी भी पात्र गरीब, प्रवासी श्रमिक या जनजातीय लाभार्थी को उसके निर्धारित कोटे का राशन देने से इनकार नहीं किया जाएगा।
बृजमोहन अग्रवाल ने कहा कि बस्तर, सरगुजा और अन्य दूरस्थ इलाकों में रहने वाले जनजातीय परिवारों तथा रोजगार के लिए बाहर जाने वाले श्रमिकों को लंबे समय से इस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। इसी जनहित के मुद्दे को संसद में उठाया गया ताकि सभी पात्र लोगों को बिना किसी बाधा के खाद्यान्न उपलब्ध हो सके।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार का यह आश्वासन राहत देने वाला है कि तकनीकी कारणों से किसी भी गरीब का राशन नहीं रोका जाएगा। अब आवश्यकता इस बात की है कि इन निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन राज्य स्तर पर भी सुनिश्चित किया जाए, जिससे प्रत्येक पात्र हितग्राही को समय पर और बिना किसी परेशानी के उसका राशन मिल सके।