दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद होने पर अभिजीत दीपके का हमला, बोले- मोदी पूरी दिल्ली बंद करने को तैयार, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाएंगे

दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों को अगले आदेश तक बंद रखने के फैसले पर CJP प्रमुख अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आंदोलन रोकने के लिए सख्ती कर रही है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान नहीं दे रही।

Jul 23, 2026 - 11:55
 0  2
दिल्ली मेट्रो स्टेशन बंद होने पर अभिजीत दीपके का हमला, बोले- मोदी पूरी दिल्ली बंद करने को तैयार, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान को नहीं हटाएंगे

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) द्वारा सुरक्षा कारणों से राजधानी के 16 मेट्रो स्टेशनों की एंट्री और एग्जिट सेवाएं अगले आदेश तक बंद रखने के फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की आलोचना की है। उन्होंने सोशल मीडिया और मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि सरकार आंदोलन को रोकने के लिए पूरी दिल्ली को बंद करने को तैयार है, लेकिन प्रदर्शनकारियों की मांगों पर विचार नहीं कर रही।

अभिजीत दीपके ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता आंदोलन को नियंत्रित करना दिखाई दे रही है, जबकि छात्रों और युवाओं द्वारा उठाए जा रहे मुद्दों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया जा रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग लगातार उठाई जा रही है, लेकिन सरकार इस पर कोई निर्णय लेने के बजाय सुरक्षा प्रतिबंध बढ़ा रही है।

DMRC ने गुरुवार सुबह 7:30 बजे से सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र 16 मेट्रो स्टेशनों पर यात्रियों की एंट्री और एग्जिट सेवाएं बंद रखने की घोषणा की। प्रभावित स्टेशनों में राजीव चौक, सुप्रीम कोर्ट, मंडी हाउस, आईटीओ, लोक कल्याण मार्ग, पटेल चौक, रामकृष्ण आश्रम मार्ग, बाराखंभा रोड, सेवा तीर्थ, जनपथ, केंद्रीय सचिवालय, दिल्ली गेट, इंद्रप्रस्थ, खान मार्केट, जोर बाग और शिवाजी स्टेडियम शामिल हैं।

हालांकि, DMRC ने स्पष्ट किया है कि राजीव चौक, मंडी हाउस और केंद्रीय सचिवालय स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा जारी रहेगी। यात्री इन स्टेशनों पर केवल एक लाइन से दूसरी लाइन में स्थानांतरण कर सकेंगे, लेकिन स्टेशन के भीतर प्रवेश या बाहर निकलने की अनुमति नहीं होगी।

इधर, CJP की अपील पर देशभर से छात्र और युवा जंतर-मंतर पहुंच रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की बताई जा रही है। इसी मांग को लेकर 20 जुलाई को संसद मार्च भी आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा और पुलिस कार्रवाई के बाद आंदोलन और तेज हो गया है।

आंदोलन से जुड़े लोग लगातार जंतर-मंतर पर डटे हुए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी लंबे समय से भूख हड़ताल पर हैं। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें पहले सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया और बाद में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान भी उनका अनशन जारी है।

दिल्ली में जारी आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच राजधानी की यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। मेट्रो स्टेशनों के बंद रहने से हजारों यात्रियों को वैकल्पिक साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियां जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में लगातार निगरानी बनाए हुए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच आंदोलनकारी सरकार से अपनी मांगों पर सकारात्मक निर्णय लेने की अपील कर रहे हैं, जबकि प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। आने वाले दिनों में आंदोलन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार तथा प्रदर्शनकारियों के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।