बलरामपुर में मुरुमीकरण घोटाले का आरोप, 800 ट्रैक्टर के फर्जी बिल की जांच शुरू

बलरामपुर जिले में सड़क मुरुमीकरण कार्य में 800 ट्रैक्टर मुरुम का फर्जी बिल बनाकर सरकारी राशि के दुरुपयोग का आरोप सामने आया है। मीडिया में मामला उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच के दौरान ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने सरपंच और सचिव पर गंभीर आरोप लगाए।

Jul 23, 2026 - 13:14
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बलरामपुर में मुरुमीकरण घोटाले का आरोप, 800 ट्रैक्टर के फर्जी बिल की जांच शुरू

UNITED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में सड़क मुरुमीकरण कार्य में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि बरसात के दौरान ग्रामीणों की आवागमन समस्या दूर करने के लिए सड़क पर मुरुम डालने का कार्य स्वीकृत किया गया था, लेकिन धरातल पर सीमित मात्रा में मुरुम डाले जाने के बावजूद लगभग 800 ट्रैक्टर मुरुम का बिल तैयार कर सरकारी राशि निकालने की कोशिश की गई। मामले के सामने आने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।

जानकारी के अनुसार, गांव में सड़क सुधार के लिए मुरुमीकरण कार्य कराया जाना था। ग्रामीणों का आरोप है कि मौके पर केवल दो से चार ट्रैक्टर मुरुम ही डाला गया, जबकि रिकॉर्ड में लगभग 800 ट्रैक्टर मुरुम उपयोग होने का उल्लेख कर बिल तैयार किया गया। इस कथित अनियमितता की खबर मीडिया में प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और जांच के लिए अधिकारियों की टीम गांव पहुंची।

जांच के दौरान अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया। ग्रामीणों ने दावा किया कि मौके पर मुरुम का नामोनिशान तक नहीं है और सड़क की स्थिति भी कार्य नहीं होने की पुष्टि कर रही है। निरीक्षण के समय बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी नाराजगी व्यक्त की।

जांच के दौरान सरपंच, सचिव और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पंचायत में आमसभा और ग्रामसभा की बैठकें पारदर्शी तरीके से नहीं कराई जातीं। उनका कहना था कि वार्ड प्रतिनिधियों को निर्णय प्रक्रिया से दूर रखा जाता है और पंचायत के कई कार्य बिना जानकारी के किए जाते हैं। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों में अनियमितता कर सरकारी धन के दुरुपयोग का प्रयास किया गया है।

ग्रामीणों ने अधिकारियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने की मांग की। उनका कहना है कि यदि समय रहते इस प्रकार के मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की पारदर्शिता प्रभावित होगी और सरकारी योजनाओं का लाभ आम लोगों तक नहीं पहुंच पाएगा।

प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों की शिकायतें सुनने के बाद पूरे मामले की जांच कर तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार करने की बात कही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामले की जांच जारी है और प्रशासन ने सभी संबंधित दस्तावेजों एवं भुगतान रिकॉर्ड की भी जांच शुरू कर दी है।