योजना के तहत जिले में धान (सिंचित एवं असिंचित), मक्का, सोयाबीन, अरहर (तुअर), मूंग, उड़द, कोदो, कुटकी, रागी और मूंगफली जैसी प्रमुख खरीफ फसलों को अधिसूचित किया गया है। इन फसलों की खेती करने वाले ऋणी और गैर-ऋणी दोनों प्रकार के किसान योजना का लाभ ले सकते हैं।
अधिसूचित ग्रामों में कृषि ऋण लेने वाले किसानों के लिए योजना में शामिल होना अनिवार्य रहेगा। वहीं, गैर-ऋणी किसान स्वेच्छा से आधार कार्ड, बैंक पासबुक, बी-1, खसरा तथा स्व-प्रमाणित फसल बोआई प्रमाण-पत्र जमा कर फसल बीमा करा सकते हैं। इससे अधिक से अधिक किसानों को योजना का लाभ मिलने की उम्मीद है।
खरीफ वर्ष 2026-27 के लिए जिले में बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। योजना के तहत फसल की बुआई या रोपाई में बाधा, प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति, कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक चक्रवात, चक्रवाती वर्षा, बेमौसमी बारिश, ओलावृष्टि तथा जलभराव जैसी परिस्थितियों से होने वाले नुकसान को भी बीमा सुरक्षा के दायरे में रखा गया है।
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसानों को बीमित राशि का केवल 2 प्रतिशत प्रीमियम ही जमा करना होगा, जबकि शेष प्रीमियम राशि का वहन केंद्र और राज्य सरकार द्वारा किया जाएगा। इससे कम लागत में किसानों को व्यापक बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान आर्थिक जोखिम कम होगा।
कृषि विभाग ने किसानों को यह भी सलाह दी है कि यदि किसी किसान ने एक ही अधिसूचित फसल के लिए अलग-अलग बैंकों या वित्तीय संस्थानों से कृषि ऋण लिया है, तो वह केवल एक ही स्थान से फसल बीमा कराए। एक ही रकबे या खसरे का दोहरा बीमा कराने पर आवेदन निरस्त किया जा सकता है।
विभाग ने किसानों से अंतिम तिथि का इंतजार न करने की अपील करते हुए कहा है कि वे अपने निकटतम प्राथमिक कृषि साख समिति, संबंधित बैंक, लोक सेवा केंद्र या बजाज एलियांज जनरल इंश्योरेंस कंपनी के माध्यम से समय रहते फसल बीमा कराएं। इससे प्राकृतिक आपदा की स्थिति में उन्हें आर्थिक सुरक्षा मिलेगी और खेती में होने वाले संभावित नुकसान की भरपाई करने में सहायता प्राप्त होगी।