भारत को बड़ी राहत! रूसी तेल पर 500% टैरिफ प्रस्ताव घटकर 100%, ट्रंप समर्थित बिल में बड़ा बदलाव

अमेरिकी सीनेट में पेश रूस प्रतिबंध विधेयक के संशोधित मसौदे में भारत और चीन जैसे रूसी तेल खरीदार देशों पर प्रस्तावित अधिकतम 500% टैरिफ को घटाकर 100% कर दिया गया है। हालांकि यह अभी केवल प्रस्तावित विधेयक है और कानून बनने के लिए सीनेट सहित आगे की प्रक्रिया बाकी है।

Jul 15, 2026 - 11:57
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भारत को बड़ी राहत! रूसी तेल पर 500% टैरिफ प्रस्ताव घटकर 100%, ट्रंप समर्थित बिल में बड़ा बदलाव

UNITED NEWS OF ASIA. भारत और चीन जैसे देशों के लिए राहत की खबर सामने आई है। अमेरिका में रूस पर नए प्रतिबंधों से जुड़े संशोधित विधेयक में रूसी तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर प्रस्तावित अधिकतम 500 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। यह बदलाव मूल प्रस्ताव की तुलना में बड़ा संशोधन माना जा रहा है। हालांकि यह अभी केवल एक विधेयक है और इसे कानून बनने के लिए अमेरिकी सीनेट सहित आगे की विधायी प्रक्रिया से गुजरना होगा।

रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों द्वारा पेश किए गए संशोधित रूस प्रतिबंध विधेयक का उद्देश्य रूस पर आर्थिक दबाव बढ़ाना और उसके ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय को सीमित करना है। पहले प्रस्ताव में रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर अधिकतम 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था, लेकिन संशोधित मसौदे में इसे घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही राष्ट्रपति को राष्ट्रीय हित में प्रतिबंधों में छूट देने की शक्ति भी प्रस्तावित की गई है।

यह प्रस्ताव रूस के सबसे बड़े तेल खरीदार देशों को लक्षित करता है, जिनमें भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं। वहीं प्राकृतिक गैस आयात के मामले में कुछ देशों को राहत देने का भी प्रावधान रखा गया है। जिन देशों का रूस से प्राकृतिक गैस आयात सीमित है और जो उस पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है।

यह विधेयक दिवंगत अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम की प्रमुख पहल माना जाता है। उन्होंने रूस के खिलाफ कड़े आर्थिक कदम उठाने की वकालत की थी। उनके निधन के बाद भी दोनों दलों के कई सांसद इस विधेयक को आगे बढ़ाने के पक्ष में हैं। संशोधित मसौदे में उनके मूल प्रस्ताव की तुलना में कुछ प्रावधानों को नरम किया गया है ताकि इसे व्यापक समर्थन मिल सके।

फिलहाल यह विधेयक अमेरिकी सीनेट में विचाराधीन है। इसे कानून बनने से पहले सीनेट और अन्य आवश्यक विधायी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा। इसलिए अभी भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं हुआ है। यदि विधेयक पारित होता है, तब भी इसके प्रावधानों को लागू करने और राष्ट्रपति के विवेकाधिकार से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण होंगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि 500 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक प्रस्तावित कमी भारत और चीन जैसे देशों के लिए तत्काल राहत का संकेत है, लेकिन अंतिम स्थिति अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी और आगे की राजनीतिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।