प्रदेश सरकार तीर्थ यात्राओं को अधिक सुगम, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए बड़े स्तर पर कार्य कर रही है। इसी क्रम में केदारनाथ धाम और हेमकुंड साहिब के लिए महत्वाकांक्षी रोपवे परियोजनाओं की शुरुआत की गई है, जो श्रद्धालुओं के लिए यात्रा को आसान बनाएंगी।
केदारनाथ धाम के लिए सोनप्रयाग से करीब 12.9 किलोमीटर लंबा रोपवे बनाया जाएगा, जिसकी अनुमानित लागत 4,081 करोड़ रुपये है। इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद यात्रियों को कठिन पहाड़ी मार्ग से पैदल या खच्चर से जाने की आवश्यकता काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे बुजुर्गों और दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष रूप से लाभ मिलेगा।
इसी तरह हेमकुंड साहिब के लिए गोविंदघाट से लगभग 12.4 किलोमीटर लंबा रोपवे तैयार किया जाएगा, जिसकी लागत करीब 2,730 करोड़ रुपये बताई गई है। यह परियोजना सिख श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगी, क्योंकि हेमकुंड साहिब की यात्रा अब तक काफी कठिन मानी जाती रही है।
इन रोपवे परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रा का समय काफी कम हो जाएगा और श्रद्धालुओं को सुरक्षित तथा आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। साथ ही इससे पर्यटन को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न केवल धार्मिक पर्यटन को गति मिलेगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। होटल, परिवहन, गाइड सेवा और अन्य पर्यटन से जुड़े व्यवसायों में भी वृद्धि होगी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि उत्तराखंड को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसके लिए आधुनिक सुविधाओं के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का भी विशेष ध्यान रखा जा रहा है।
उत्तराखंड में चल रही ये परियोजनाएं यह दर्शाती हैं कि राज्य सरकार आस्था और विकास के बीच संतुलन बनाते हुए आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इन योजनाओं के पूरा होने के बाद उत्तराखंड देश-विदेश के पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षक गंतव्य बन जाएगा।