कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि महिला अधिकारियों को अब तक स्थायी कमीशन और पेंशन का लाभ न दिया जाना किसी नियम की वजह से नहीं, बल्कि पूर्वाग्रह का परिणाम था। न्यायालय ने इस मानसिकता को अस्वीकार्य बताते हुए सरकार और सेना को निर्देश दिया कि सभी पात्र महिला अधिकारियों को समान अवसर और अधिकार सुनिश्चित किए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला अधिकारियों ने देश की सेवा में पुरुष अधिकारियों के समान ही योगदान दिया है, इसलिए उनके साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है और इस आधार पर महिला अधिकारियों को भी समान अवसर मिलना चाहिए।
इस फैसले के तहत अब उन सभी महिला अधिकारियों को पेंशन का लाभ मिलेगा, जिन्हें पहले केवल शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत सेवा समाप्त होने पर बाहर कर दिया जाता था। इससे हजारों महिला अधिकारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रही थीं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय न केवल महिला अधिकारियों के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक सकारात्मक संदेश है। इससे महिलाओं की भूमिका को सेना जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र में और मजबूती मिलेगी तथा भविष्य में अधिक महिलाएं रक्षा सेवाओं में शामिल होने के लिए प्रेरित होंगी।
यह फैसला भारतीय सेना के ढांचे में बदलाव की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि इससे नीति निर्माण और कार्यान्वयन में लैंगिक समानता को बढ़ावा मिलेगा।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब यह उम्मीद की जा रही है कि सरकार जल्द ही आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर इस आदेश को प्रभावी रूप से लागू करेगी।
कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल महिला अधिकारियों के अधिकारों की जीत है, बल्कि यह देश में समानता और न्याय की भावना को भी मजबूत करता है।