ग्राम पिरदा में गूंजा भोजली का जयकारा, धूमधाम से निकली मां भोजली की जस झांकी

बेमेतरा के ग्राम पिरदा में पोला पर्व के अवसर पर श्री बाल भोजली उत्सव समिति ने मां भोजली विसर्जन समारोह और भव्य जस झांकी का आयोजन किया। भाजपा किसान नेता योगेश तिवारी ने शामिल होकर पूजा-अर्चना की। बच्चों और ग्रामीणों की सहभागिता से आयोजन में छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की झलक देखने को मिली।

Sep 10, 2026 - 17:05
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ग्राम पिरदा में गूंजा भोजली का जयकारा, धूमधाम से निकली मां भोजली की जस झांकी

UNITED NEWS OF ASIA. अरुण पुरेना, बेमेतरा l जिले के ग्राम पिरदा में पोला पर्व के अवसर पर मां भोजली विसर्जन समारोह और भव्य जस झांकी का आयोजन पारंपरिक श्रद्धा और उत्साह के साथ किया गया। श्री बाल भोजली उत्सव समिति, ग्राम पिरदा की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान पूरे गांव में भोजली गीतों और जयकारों की गूंज सुनाई दी और लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मां भोजली की पूजा-अर्चना की।

आयोजन में भाजपा किसान नेता एवं सर्व सनातन संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश तिवारी भी शामिल हुए। उन्होंने मां भोजली की पूजा-अर्चना कर क्षेत्रवासियों को भोजली पर्व की बधाई और शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर उन्होंने आयोजन समिति और ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना करते हुए छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने में ऐसे आयोजनों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।

समारोह की सबसे खास बात बच्चों की उत्साहपूर्ण भागीदारी रही। गांव की छोटी-छोटी बच्चियां और बच्चे सिर पर भोजली लेकर जस झांकी और रोड शो में शामिल हुए। सिर पर सजी भोजली और पारंपरिक गीतों के बीच बच्चों की सहभागिता ने पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति के रंग में रंग दिया। ग्रामीणों ने भी बड़ी संख्या में इस झांकी में हिस्सा लिया और पारंपरिक उत्सव का आनंद लिया।

जस झांकी और रोड शो के दौरान गांव की गलियों में उत्साह और उमंग का माहौल रहा। पारंपरिक गीत-संगीत के साथ निकली झांकी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। महिलाओं, बच्चों और ग्रामीणों की सहभागिता से आयोजन को सामुदायिक स्वरूप मिला। कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और ग्रामीण जीवन से जुड़ी परंपराओं की झलक देखने को मिली।

भोजली पर्व को छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति से जुड़ी महत्वपूर्ण परंपरा माना जाता है। भोजली को हरियाली, समृद्धि, खुशहाली और आपसी भाईचारे के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। पूजा और विसर्जन की यह परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों की सहभागिता रहती है। ग्राम पिरदा में आयोजित कार्यक्रम में भी इस परंपरा को सामूहिक रूप से निभाया गया।

योगेश तिवारी ने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी समृद्ध लोक परंपराओं और त्योहारों से है। उन्होंने कहा कि जब बच्चे भी उत्साह के साथ भोजली जैसी परंपराओं में भाग लेते हैं, तो इससे आने वाली पीढ़ी तक संस्कृति और परंपराओं को पहुंचाने का अवसर मिलता है। उन्होंने आयोजन समिति, ग्रामवासियों, मातृशक्ति और भोजली लेकर शामिल हुए सभी बच्चों को शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम के दौरान मां भोजली का विधिवत विसर्जन किया गया। ग्रामीणों ने गांव और क्षेत्र की सुख-समृद्धि, खुशहाली और मंगल की कामना की। पारंपरिक रीति-रिवाजों, भोजली गीतों और जस झांकी के साथ आयोजित यह समारोह ग्रामीणों के लिए यादगार बन गया।

इस अवसर पर योगेश यादव, दीपक साहू, अर्जुन ध्रुव, कैलाश यादव, किशोर यादव, ठाकुर राम निषाद, मनविश्राम यादव, राजू साहू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। आयोजन के सफल संचालन में श्री बाल भोजली उत्सव समिति और ग्रामीणों की सहभागिता रही। पोला पर्व के अवसर पर आयोजित इस समारोह ने एक बार फिर छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं और सामुदायिक संस्कृति की जीवंत तस्वीर प्रस्तुत की।