बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत को लेकर सुकमा कांग्रेस का प्रदर्शन, स्वास्थ्य मंत्री के इस्तीफे समेत तीन मांगें
बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर सुकमा में कांग्रेस ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिश कवासी और आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष वेको हूंगा ने पत्रकार वार्ता में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे, बालाघाट में हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने और मृत बच्चों के परिवारों को एक करोड़ रुपये मुआवजा देने की मांग की।
UNITED NEWS OF ASIA. रिजेन्ट गिरी, सुकमा l बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत के मामले को लेकर सुकमा में कांग्रेस ने मध्यप्रदेश सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिला कांग्रेस कमेटी और आदिवासी कांग्रेस की ओर से आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस नेताओं ने बालाघाट की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए। जिला कांग्रेस अध्यक्ष हरिश कवासी और आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष वेको हूंगा ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए सरकार पर आदिवासी बहुल और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।
कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, बालाघाट जिले में मलेरिया, डायरिया और कुपोषण जैसी स्वास्थ्य समस्याओं के बीच करीब 30 आदिवासी बच्चों की मौत हुई है। कांग्रेस का दावा है कि 18 मई को पहले बच्चे की मौत के बाद भी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए। हालांकि, बच्चों की मौत के कारणों और संख्या से जुड़े इन दावों की आधिकारिक स्थिति संबंधित जांच और प्रशासनिक रिपोर्ट के आधार पर स्पष्ट होगी।
पत्रकार वार्ता में हरिश कवासी ने कहा कि आदिवासी बहुल और दूरस्थ इलाकों में अस्पताल, डॉक्टर, दवाइयों और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण गरीब परिवारों को समय पर इलाज मिलने में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि बालाघाट में बच्चों की मौत का मामला केवल एक जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ा विषय नहीं है, बल्कि आदिवासी समाज के स्वास्थ्य, अधिकार और शासन की जवाबदेही से भी संबंधित है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार को तत्काल प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उनका कहना है कि ग्रामीण और दूरस्थ इलाकों में रहने वाले लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर आंदोलन को आगे बढ़ाने की भी बात कही है।
आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. विक्रांत भूरिया के निर्देश पर देशभर के जिला मुख्यालयों में एक दिवसीय ‘न्याय सत्याग्रह’ आयोजित किए जाने की जानकारी भी पत्रकार वार्ता में दी गई। कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान के माध्यम से आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं और बच्चों की मौत से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा।
आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष वेको हूंगा ने पत्रकार वार्ता के दौरान सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली मांग स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के इस्तीफे की है। कांग्रेस ने कहा कि बालाघाट में बच्चों की मौत की जिम्मेदारी तय करते हुए स्वास्थ्य मंत्री को पद से इस्तीफा देना चाहिए। दूसरी मांग बालाघाट में हेल्थ इमरजेंसी घोषित करने की है, ताकि स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत कर प्रभावित क्षेत्रों में तत्काल आवश्यक चिकित्सा सहायता पहुंचाई जा सके।
कांग्रेस की तीसरी प्रमुख मांग मृत बच्चों के प्रत्येक परिवार को एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की है। वेको हूंगा ने कहा कि केवल औपचारिक जांच या बयानबाजी से प्रभावित परिवारों को राहत नहीं मिलेगी। सरकार को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के साथ पीड़ित परिवारों को आर्थिक सहायता देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
फिलहाल बालाघाट में आदिवासी बच्चों की मौत का मुद्दा राजनीतिक बहस का केंद्र बना हुआ है। सुकमा में कांग्रेस की पत्रकार वार्ता के जरिए इस मुद्दे को मध्यप्रदेश सरकार के सामने उठाया गया है। कांग्रेस ने मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में आंदोलन को आगे भी जारी रखने की बात कही है। मामले में बच्चों की मौत के वास्तविक कारण, प्रशासनिक जिम्मेदारी और स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति जांच एवं आधिकारिक रिपोर्ट के जरिए स्पष्ट होना बाकी है।