कलेक्ट्रेट में घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिले कलेक्टर, बैगा समाज में नाराजगी

कबीरधाम कलेक्ट्रेट पहुंचे सैकड़ों बैगा आदिवासी शाम 6:30 बजे तक कलेक्टर से मुलाकात का इंतजार करते रहे, लेकिन भेंट नहीं हो सकी। नाराज आदिवासी प्रतिनिधियों ने प्रशासन की संवेदनहीनता पर सवाल उठाते हुए वनांचल से आने वाले आदिवासियों के लिए प्राथमिकता स्लॉट तय करने की मांग की है।

Jun 12, 2026 - 13:25
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कलेक्ट्रेट में घंटों इंतजार के बाद भी नहीं मिले कलेक्टर, बैगा समाज में नाराजगी

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले में कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे सैकड़ों बैगा आदिवासियों को घंटों इंतजार के बावजूद जिला कलेक्टर से मुलाकात नहीं होने पर भारी नाराजगी का सामना करना पड़ा। छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद की कबीरधाम शाखा के नेतृत्व में विभिन्न वनांचल क्षेत्रों से आए ग्रामीण शाम 6:30 बजे तक अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट परिसर में बैठे रहे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ा।

परिषद के जिलाध्यक्ष कामू बैगा ने बताया कि जिले के दूरस्थ वन क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बैगा समुदाय के लोग अपनी समस्याओं और मांगों को लेकर जिला मुख्यालय पहुंचे थे। ग्रामीण दोपहर से ही कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद रहे और कलेक्टर से मिलने की उम्मीद में इंतजार करते रहे। हालांकि देर शाम तक भी उनकी मुलाकात नहीं हो सकी, जिससे समाज के लोगों में नाराजगी और असंतोष बढ़ गया।

कामू बैगा का कहना है कि बैगा समुदाय के अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर हैं और जिले के सुदूर वनांचल क्षेत्रों से 70 से 80 किलोमीटर की दूरी तय कर सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से जिला मुख्यालय पहुंचते हैं। ऐसे में पूरे दिन इंतजार करने के बाद बिना किसी समाधान के वापस लौटना उनके लिए बेहद कष्टदायक स्थिति है।

उन्होंने आरोप लगाया कि शाम तक इंतजार करवाने के कारण कई ग्रामीणों की वापसी के लिए उपलब्ध बसें और अन्य परिवहन साधन छूट गए। इसके चलते अनेक लोगों को रात में ठहरने और भोजन जैसी मूलभूत समस्याओं का सामना करना पड़ा। परिषद का कहना है कि ऐसी परिस्थितियां आदिवासी समुदाय के प्रति प्रशासनिक संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती हैं।

घटना के बाद छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने जिला कलेक्टर को पत्र सौंपकर अपनी नाराजगी दर्ज कराई है। पत्र में मांग की गई है कि वनांचल क्षेत्रों से आने वाले बैगा आदिवासियों के लिए कलेक्ट्रेट में विशेष प्राथमिकता स्लॉट निर्धारित किया जाए, ताकि उन्हें लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े और वे अपनी समस्याएं रखकर समय पर अपने गांव लौट सकें।

परिषद ने यह भी मांग की है कि विशेष पिछड़ी जनजाति के लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर सुना जाए और उनके निराकरण के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए। संगठन का कहना है कि शासन और प्रशासन के प्रति आदिवासी समुदाय का विश्वास बनाए रखने के लिए उनकी समस्याओं का संवेदनशीलता और गंभीरता के साथ समाधान किया जाना आवश्यक है।

बैगा समाज के प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि जिला प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा तथा वनांचल क्षेत्रों से आने वाले आदिवासियों के लिए बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।