स्वस्थ छत्तीसगढ़ की नई रूपरेखा तैयार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ पर रहेगा विशेष फोकस

रायपुर में आयोजित ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़ परामर्श’ में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, डिजिटल हेल्थ, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर जोर दिया। राज्य के लिए नया स्वास्थ्य रोडमैप तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।

Jun 12, 2026 - 15:30
 0  2
स्वस्थ छत्तीसगढ़ की नई रूपरेखा तैयार, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और डिजिटल हेल्थ पर रहेगा विशेष फोकस

UNITED NEWS OF ASIA. रोहिताश सिंह भुवाल, दुर्ग l छत्तीसगढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुलभ, प्रभावी और जनकेंद्रित बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए नई रणनीति तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की है। इसी क्रम में नवा रायपुर स्थित स्वास्थ्य भवन में आयोजित ‘स्वस्थ छत्तीसगढ़ परामर्श’ कार्यक्रम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने राज्य की स्वास्थ्य चुनौतियों, उपलब्धियों और भविष्य की संभावनाओं पर व्यापक चर्चा की।

परामर्श बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी, दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता तथा डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को प्रमुख प्राथमिकताओं के रूप में चिन्हित किया गया। बैठक की अध्यक्षता स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव अमित कटारिया ने की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना है और इसके लिए स्वास्थ्य तंत्र को लगातार मजबूत किया जा रहा है।

विशेषज्ञों ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए गर्भवती महिलाओं की समय पर पहचान, नियमित स्वास्थ्य जांच, सुरक्षित प्रसव और प्रभावी रेफरल प्रणाली को मजबूत करने की आवश्यकता बताई। दूरस्थ और आदिवासी क्षेत्रों में रहने वाली महिलाओं तक समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने के लिए विशेष रणनीति अपनाने पर भी जोर दिया गया।

सुरक्षित मातृत्व को बढ़ावा देने के लिए जिला अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के निकट बर्थ वेटिंग होम स्थापित करने, आपातकालीन परिवहन सेवाओं को सशक्त बनाने तथा प्रसूति सेवाओं से जुड़े स्वास्थ्यकर्मियों के कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इन उपायों से मातृ मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

बाल स्वास्थ्य पर आयोजित सत्रों में नवजात मृत्यु, निमोनिया, डायरिया और कुपोषण जैसी चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने जन्म के तुरंत बाद स्तनपान को बढ़ावा देने, नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल और समुदाय स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने को आवश्यक बताया। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक देखभाल और जागरूकता से बच्चों के स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार लाया जा सकता है।

बैठक में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए तकनीक और आंकड़ों के बेहतर उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि डेटा आधारित निर्णयों से स्वास्थ्य योजनाओं की प्रभावी निगरानी, संसाधनों का बेहतर उपयोग और आवश्यकतानुसार सेवाओं का विस्तार संभव हो सकेगा। स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती, प्रशिक्षण और उन्हें दूरस्थ क्षेत्रों में लंबे समय तक सेवाएं देने के लिए प्रोत्साहन तंत्र विकसित करने के सुझाव भी दिए गए।

परामर्श के दौरान मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की उपलब्धियों को भी साझा किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि व्यापक स्वास्थ्य जांच, गांव-गांव तक पहुंच और तकनीक आधारित सेवाओं के माध्यम से बस्तर क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।

डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार को भविष्य की महत्वपूर्ण आवश्यकता बताते हुए ई-संजीवनी, डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड, ABHA आधारित सेवाओं और ऑनलाइन रेफरल प्रणाली को मजबूत करने की सिफारिश की गई। बैठक के अंत में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सहमति जताई कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, मजबूत मानव संसाधन और डिजिटल तकनीकों के प्रभावी उपयोग के माध्यम से छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर सकता है। राज्य सरकार इन सुझावों के आधार पर एक व्यापक स्वास्थ्य रोडमैप तैयार करेगी, जो आने वाले वर्षों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं का आधार बनेगा।