समारोह में विधायक भावना बोहरा ने लौटे हुए सभी जनजातीय भाई-बहनों का स्वागत किया और पारंपरिक तरीके से उनके पैर पखारकर सम्मान प्रकट किया। यह दृश्य सांस्कृतिक आत्मगौरव, सम्मान और सामाजिक एकता का प्रतीक बन गया। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल धार्मिक विषय तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को अपनी सांस्कृतिक अस्मिता से जोड़ने का अभियान है।
कार्यक्रम का आयोजन पंडरिया विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम कुल्हीडोंगरी में किया गया, जहां आसपास के वनांचल क्षेत्रों से आए परिवारों ने सामूहिक रूप से अपने परंपरागत रीति-रिवाजों के साथ समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लिया।
विधायक भावना बोहरा ने अपने संबोधन में कहा कि पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में सनातन संस्कृति के प्रचार-प्रसार तथा आदिवासी एवं वनवासी परंपराओं के संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लंबे समय तक संसाधनों की कमी, जानकारी के अभाव और प्रलोभन के कारण कई परिवार अपनी परंपराओं से दूर हो गए थे, लेकिन अब जागरूकता, संवाद और विश्वास के माध्यम से जनजातीय समाज फिर से अपनी जड़ों की ओर लौट रहा है।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इससे पूर्व नेऊर क्षेत्र से 115 नागरिक, कुई-कुकदुर क्षेत्र से 70 नागरिक और ग्राम दमगढ़ से 50 नागरिक घर वापसी कर चुके हैं। आज कुल्हीडोंगरी में 165 नागरिकों की वापसी के साथ पंडरिया विधानसभा क्षेत्र में अब तक 400 से अधिक आदिवासी नागरिक अपने मूल धर्म और सांस्कृतिक परंपराओं से पुनः जुड़ चुके हैं।
विधायक ने कहा कि राज्य में धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियों पर नियंत्रण और धार्मिक स्वतंत्रता के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार गंभीर है। आगामी बजट सत्र में छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे प्रलोभन, दबाव अथवा छल के माध्यम से किए जाने वाले धर्म परिवर्तन पर प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।
उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों का उल्लेख करते हुए बताया कि नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में वनांचल क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिली है। स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए निःशुल्क एम्बुलेंस सेवा, मोबाइल हेल्थ लैब, बाइक एम्बुलेंस, शिक्षा सुविधाओं का विस्तार, अधोसंरचना विकास और जनजातीय परिवारों के लिए प्रधानमंत्री आवास योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।
विधायक भावना बोहरा ने दोहराया कि सरकार और जनप्रतिनिधियों का उद्देश्य आदिवासी समाज को सम्मान, विकास और सांस्कृतिक संरक्षण के साथ आगे बढ़ाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी पहचान और परंपराओं पर गर्व कर सकें।