जैविक पोषण वाटिका से एनीमिया मुक्त कबीरधाम का संकल्प, स्वयंसेवी संगठन हुए एकजुट

कबीरधाम जिले में एनीमिया की समस्या से निपटने के लिए विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने सामूहिक पहल शुरू की है। जैविक पोषण वाटिका को बढ़ावा देकर जिले को एनीमिया मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है।

Jun 12, 2026 - 15:06
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जैविक पोषण वाटिका से एनीमिया मुक्त कबीरधाम का संकल्प, स्वयंसेवी संगठन हुए एकजुट

UNITED NEWS OF ASIA. सौरभ नामदेव, कवर्धा l कबीरधाम जिले को एनीमिया मुक्त बनाने के उद्देश्य से जिले के विभिन्न स्वयंसेवी संगठनों ने एकजुट होकर महत्वपूर्ण पहल की है। इसी दिशा में 10 जून 2026 को कवर्धा स्थित ग्रामोदय ग्राम विकास समिति कार्यालय में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें जिले में बढ़ती एनीमिया की समस्या और उसके स्थायी समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई।

बैठक का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, किशोरियों और बच्चों में खून की कमी की समस्या को दूर करने के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रभावी रणनीति तैयार करना था। इस दौरान राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि छत्तीसगढ़ में 15 से 49 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 61 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया से प्रभावित पाई गई थीं। यह आंकड़ा राज्य में पोषण और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों की गंभीरता को दर्शाता है।

बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में मुंबई स्थित ‘द सहायक ट्रस्ट’ से आए पीयूष सोनी ने भाग लिया। उन्होंने एनीमिया की समस्या के मूल कारणों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संतुलित और पोषक आहार की कमी इस समस्या की प्रमुख वजह है। उन्होंने बताया कि घर-घर में ‘जैविक पोषण वाटिका’ विकसित कर इस समस्या का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है।

उन्होंने समझाया कि यदि परिवार अपने घरों के आंगन, खेत की मेड़ों या खाली भूमि में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी सब्जियां और पोषक तत्वों से भरपूर फसलें उगाएं, तो उन्हें ताजा और सुरक्षित भोजन मिलेगा। इससे परिवारों में पोषण स्तर बेहतर होगा और एनीमिया जैसी समस्याओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।

बैठक में जिले के कई प्रमुख सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें आस्था कला मंच, नई चमक रक्तदान एवं जनकल्याण समिति, शिवमंगल महिला समिति, समर्थ चैरिटेबल ट्रस्ट, एग्रिकोन समिति और ग्रामोदय ग्राम विकास समिति के प्रतिनिधि शामिल रहे। सभी ने सामूहिक रूप से जिले में जैविक पोषण वाटिका को बढ़ावा देने और लोगों को इसके प्रति जागरूक करने का संकल्प लिया।

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि विभिन्न गांवों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। साथ ही लोगों को पोषण वाटिका तैयार करने की तकनीक, जैविक खेती के लाभ और पोषणयुक्त खाद्य पदार्थों के महत्व की जानकारी दी जाएगी। स्वयंसेवी संगठन अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अभियान चलाकर अधिक से अधिक परिवारों को इस पहल से जोड़ने का प्रयास करेंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि एनीमिया मुक्त भारत अभियान को सफल बनाने में जनभागीदारी और सामाजिक संगठनों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल सरकारी योजनाओं से ही नहीं, बल्कि सामुदायिक सहयोग और जागरूकता से भी इस चुनौती का समाधान संभव है।

बैठक के अंत में सभी प्रतिनिधियों ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि जैविक पोषण वाटिका की अवधारणा को हर घर तक पहुंचाया जाए, तो कबीरधाम जिला एनीमिया नियंत्रण और पोषण सुधार के क्षेत्र में प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के लिए भी एक आदर्श मॉडल बन सकता है।