रायगढ़ में ग्रामीण आजीविका को नई दिशा, 7 पंचायतों में आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत

रायगढ़ जिले की 7 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत किए गए हैं। इस पहल से ग्रामीण पशुपालकों को वैज्ञानिक पशुपालन की सुविधा मिलेगी और उनकी आय में वृद्धि होगी। बकरी और देशी मुर्गी पालन के एकीकृत मॉडल से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

Jun 13, 2026 - 17:39
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रायगढ़ में ग्रामीण आजीविका को नई दिशा, 7 पंचायतों में आधुनिक बकरी पालन शेड स्वीकृत

UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने और पशुपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत जिले की 7 ग्राम पंचायतों में आधुनिक बकरी पालन शेडों की स्वीकृति दी गई है। प्रत्येक इकाई की अनुमानित लागत लगभग 3 लाख रुपये निर्धारित की गई है।

इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को पारंपरिक पशुपालन से आगे बढ़ाकर वैज्ञानिक और व्यावसायिक पशुपालन की दिशा में प्रेरित करना है। अब तक ग्रामीण क्षेत्रों में बकरी पालन पारंपरिक तरीकों से किया जाता था, जिससे कई बार मौसम, बीमारियों और उचित प्रबंधन के अभाव में पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। नई योजना के तहत बनाए जा रहे आधुनिक शेड इस समस्या का समाधान करेंगे।

इन शेडों का निर्माण वैज्ञानिक मानकों के आधार पर ऊंचे प्लेटफॉर्म पर किया जाएगा, जिससे वर्षा, जलभराव और अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियों से पशुओं को सुरक्षा मिल सके। इसके अलावा शेडों में उचित वेंटिलेशन, स्वच्छ वातावरण और बेहतर जल निकासी व्यवस्था भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा और संक्रमण व बीमारियों की संभावना कम होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर आवासीय सुविधा मिलने से बकरियों की वृद्धि दर, प्रजनन क्षमता और उत्पादन में सुधार होगा, जिससे पशुपालकों की आय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

इस योजना की खास बात यह है कि इसे एकीकृत आजीविका मॉडल के रूप में विकसित किया जा रहा है। बकरी पालन शेड के नीचे देशी मुर्गी पालन की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे ग्रामीण परिवारों को एक ही परिसर में दो अलग-अलग आय स्रोत मिल सकेंगे। बकरी पालन से दूध, खाद और पशुधन बिक्री के जरिए आय होगी, जबकि देशी मुर्गी पालन से अंडा और मांस उत्पादन के माध्यम से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होगी।

यह मॉडल विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाभकारी साबित होगा, क्योंकि इसमें कम लागत में अधिक उत्पादन और स्थायी आय के अवसर मिलेंगे।

जिला प्रशासन द्वारा पशुपालकों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसमें हरे चारे की उपलब्धता, संतुलित आहार, नियमित टीकाकरण, पशु स्वास्थ्य सेवाएं और आधुनिक पशुपालन तकनीकों की जानकारी शामिल होगी। इससे ग्रामीणों की दक्षता बढ़ेगी और वे अपने व्यवसाय को अधिक लाभकारी बना सकेंगे।

मनरेगा के तहत यह पहल ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और स्थायी परिसंपत्ति निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न केवल ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि आत्मनिर्भर गांवों के निर्माण को भी गति मिलेगी।

रायगढ़ जिले की यह पहल ग्रामीण विकास के क्षेत्र में एक मॉडल के रूप में उभर सकती है, जो अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा बनेगी।