सेमुआर पंचायत में भुगतान पर सवाल, मिष्ठान भंडार के बिल पर मोबाइल रिचार्ज और एक खाते में लाखों के भुगतान का मामला चर्चा में

सिंगरौली जिले की सेमुआर ग्राम पंचायत में भुगतान से जुड़े दस्तावेजों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। मिष्ठान भंडार के बिल पर मोबाइल नेट रिचार्ज का भुगतान, निकासी और बिल राशि में अंतर तथा विभिन्न मदों की राशि एक ही स्थानीय व्यक्ति के खाते में जाने के आरोपों को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। मामले में आधिकारिक जांच और पुष्टि अभी शेष है।

Jul 28, 2026 - 17:16
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सेमुआर पंचायत में भुगतान पर सवाल, मिष्ठान भंडार के बिल पर मोबाइल रिचार्ज और एक खाते में लाखों के भुगतान का मामला चर्चा में

UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l जिले की चितरंगी जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमुआर में पंचायत के भुगतान से जुड़े दस्तावेज सामने आने के बाद वित्तीय प्रक्रिया पर कई सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर भुगतान संबंधी कुछ ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिन्होंने स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज कर दी है। हालांकि इन दस्तावेजों में किए गए दावों की आधिकारिक पुष्टि या जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है।

दस्तावेजों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल इस बात को लेकर उठ रहा है कि मोबाइल नेट रिचार्ज का भुगतान कथित रूप से मिष्ठान भंडार के बिल के आधार पर कैसे किया गया। यदि यह दावा सही पाया जाता है तो भुगतान प्रक्रिया की पारदर्शिता और नियमों के पालन को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े होते हैं।

एक अन्य बिंदु यह भी सामने आया है कि लगभग 40 हजार रुपये की निकासी के मुकाबले उपलब्ध बिल केवल 10 हजार रुपये का बताया जा रहा है। इस अंतर को लेकर स्थानीय लोगों ने भुगतान प्रक्रिया पर संदेह जताया है। इसके अलावा संबंधित बिल पर सील और हस्ताक्षर नहीं होने की भी बात कही जा रही है, जिससे दस्तावेजों की वैधता और भुगतान की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।

मामला यहीं तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार ग्राम सभा, आनंद उत्सव, मुख्यमंत्री कार्यक्रम, पंचायत भवन की पुताई एवं मरम्मत तथा 26 जनवरी जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के लिए स्वीकृत राशि का भुगतान कथित रूप से एक ही स्थानीय व्यक्ति के खाते में किया गया। फिलहाल संबंधित व्यक्ति का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है और इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि भी शेष है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि पंचायत की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों की राशि वास्तव में एक ही खाते में स्थानांतरित की गई है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि ऐसा किस नियम और प्रक्रिया के तहत किया गया। लोगों का सवाल है कि क्या सभी भुगतान विधिसम्मत थे या फिर कहीं वित्तीय प्रक्रिया में अनियमितता हुई है।

ग्रामीणों का मानना है कि पंचायत स्तर पर होने वाले सभी वित्तीय लेन-देन पूरी पारदर्शिता के साथ होने चाहिए। यदि भुगतान से संबंधित दस्तावेजों में किसी प्रकार की विसंगति पाई जाती है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बनाए रखना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

फिलहाल यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। स्थानीय नागरिक प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि संबंधित भुगतान अभिलेखों, बैंक लेन-देन, बिलों और स्वीकृति दस्तावेजों की विस्तृत जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता या नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों एवं व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

हालांकि यह उल्लेखनीय है कि प्रस्तुत आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि भुगतान प्रक्रिया नियमानुसार हुई थी या नहीं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि जिला प्रशासन इस मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति को सार्वजनिक करता है या नहीं।