E20 ईंधन नीति पर उठे सवाल, सर्व आदिवासी समाज के जिला सचिव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग की

सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग) के जिला सचिव राजेश गोटा ने E20 ईंधन नीति को लेकर केंद्र सरकार से स्वतंत्र और पारदर्शी समीक्षा कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि इस नीति से आम जनता, किसानों और वाहन चालकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, तो सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। बयान में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से नैतिक जिम्मेदारी लेने की मांग भी की गई है।

Jul 28, 2026 - 17:13
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E20 ईंधन नीति पर उठे सवाल, सर्व आदिवासी समाज के जिला सचिव ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के इस्तीफे की मांग की

UNITED NEWS OF ASIA. राजेंद्र मांडवी, कांकेर l सर्व आदिवासी समाज (युवा प्रभाग), जिला उत्तर बस्तर कांकेर के जिला सचिव राजेश गोटा ने E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) नीति को लेकर केंद्र सरकार से व्यापक समीक्षा की मांग की है। जारी बयान में उन्होंने कहा कि इस नीति को लेकर देशभर में चर्चा और बहस चल रही है तथा इससे जुड़े सामाजिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर गंभीर विचार किए जाने की आवश्यकता है।

राजेश गोटा ने कहा कि यदि E20 ईंधन नीति के कारण आम जनता, किसानों, वाहन चालकों और उपभोक्ताओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, तो इसके लिए जवाबदेही तय की जानी चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी राष्ट्रीय नीति का उद्देश्य जनहित होना चाहिए और यदि किसी नीति से लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, तो उस पर पुनर्विचार किया जाना आवश्यक है।

उन्होंने अपने बयान में कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठने के बाद अब E20 ईंधन नीति के विरोध में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विषय पर स्पष्ट और तथ्यात्मक स्थिति सामने रखनी चाहिए।

राजेश गोटा ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि E20 नीति के प्रभावों का स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी अध्ययन कराया जाए। उन्होंने कहा कि इस समीक्षा में वाहन निर्माता कंपनियों, कृषि विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, किसानों, परिवहन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों तथा आम नागरिकों की राय को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए संतुलित निर्णय लिया जा सके।

उन्होंने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है, लेकिन किसी भी नई नीति को लागू करने से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभावों का विस्तृत आकलन होना चाहिए। यदि नीति के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की व्यावहारिक समस्या सामने आती है, तो सरकार को उसमें आवश्यक संशोधन करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

बयान में यह भी कहा गया कि आम नागरिकों और हितधारकों की चिंताओं को गंभीरता से सुनना लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार को ऐसी नीतियों के संबंध में संवाद की प्रक्रिया को मजबूत बनाना चाहिए, ताकि लोगों के मन में किसी प्रकार की आशंका या भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो।

राजेश गोटा ने कहा कि सरकार को पारदर्शी तरीके से सभी तथ्यों को सार्वजनिक करना चाहिए और यदि समीक्षा के दौरान यह पाया जाता है कि नीति के कुछ प्रावधानों में सुधार की आवश्यकता है, तो उसमें आवश्यक संशोधन किए जाने चाहिए। उनका मानना है कि व्यापक जनहित और सभी वर्गों के हितों की रक्षा को प्राथमिकता देते हुए ही किसी भी नीति को आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार E20 ईंधन नीति को लेकर उठ रही विभिन्न चिंताओं पर गंभीरता से विचार करेगी और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की रणनीति तय करेगी, जिससे आम जनता, किसानों और वाहन उपभोक्ताओं के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।