NH-343 किनारे वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप: आदिवासी समाज का विरोध, ‘बाहरी भगाओ, छत्तीसगढ़ बचाओ’ के लगे नारे

बलरामपुर जिले के बासेन पंचायत क्षेत्र में NH-343 के किनारे वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे और निर्माण को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। सर्व आदिवासी समाज ने बाहरी लोगों द्वारा वन भूमि पर अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और प्रशासन से कार्रवाई की मांग की है। समाज ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों पर मिलीभगत का आरोप भी लगाया है। मामले में अपर कलेक्टर ने जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Jun 3, 2026 - 15:48
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NH-343 किनारे वन भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप: आदिवासी समाज का विरोध, ‘बाहरी भगाओ, छत्तीसगढ़ बचाओ’ के लगे नारे

UNTED NEWS OF ASIA. अली खान, बलरामपुर l बलरामपुर जिले के बासेन पंचायत क्षेत्र में वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे का मामला अब बड़ा जन मुद्दा बनता जा रहा है। राष्ट्रीय राजमार्ग NH-343 से लगे सरईसिंया और आसपास के क्षेत्रों में सरकारी एवं वन विभाग की भूमि पर तेजी से हो रहे निर्माण कार्यों ने स्थानीय ग्रामीणों और आदिवासी समाज की चिंता बढ़ा दी है। सड़क किनारे स्थित जमीनों की बढ़ती कीमतों के बीच अतिक्रमण की शिकायतों ने प्रशासन को भी कटघरे में खड़ा कर दिया है।

स्थानीय लोगों के अनुसार NH-343 से लगे क्षेत्र में बीते कुछ समय से वन भूमि पर मकान और दुकानों का निर्माण तेजी से बढ़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोग वन क्षेत्र में कब्जा करने के उद्देश्य से बड़े-बड़े पेड़ों को नुकसान पहुंचाकर भूमि को खाली करने का प्रयास कर रहे हैं। उनका कहना है कि यह पूरा कार्य सुनियोजित तरीके से किया जा रहा है, जिससे वन संपदा को भी नुकसान पहुंच रहा है।

मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज खुलकर सामने आया है। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि वन भूमि पर अवैध कब्जे के कारण स्थानीय आदिवासियों के अधिकार और हित प्रभावित हो रहे हैं। उनका आरोप है कि बाहरी लोगों को संरक्षण देकर उन्हें बसाने की कोशिश की जा रही है, जिससे भविष्य में स्थानीय समुदाय की जमीन और संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है। इसी विरोध के तहत क्षेत्र में ‘बाहरी भगाओ, छत्तीसगढ़ बचाओ’ जैसे नारे भी लगाए गए।

ग्रामीणों और आदिवासी समाज ने वन विभाग के कुछ स्थानीय कर्मचारियों पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी और संभावित मिलीभगत के कारण ही वन भूमि पर अवैध निर्माण संभव हो पा रहा है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इस विषय को लेकर नाराजगी लगातार बढ़ रही है।

विवाद बढ़ने के बाद आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। उन्होंने मांग की कि वन भूमि पर हो रहे कथित अवैध कब्जों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही वन संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की भी मांग उठाई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने जांच का आश्वासन दिया है। अपर कलेक्टर ने कहा है कि शिकायतों की जांच कराई जाएगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता या अवैध कब्जा पाया जाता है तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद अब लोगों की निगाहें जांच रिपोर्ट और आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

फिलहाल यह मामला केवल वन भूमि पर कब्जे का नहीं, बल्कि आदिवासी अधिकारों, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष और प्रशासन की कार्रवाई तय करेगी कि वन भूमि पर अतिक्रमण के आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्षेत्र में कानून का पालन किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा।