परिवहन अनुमति की आड़ में अवैध मुरूम उत्खनन की तैयारी, नकपुरा में ग्रामीणों ने जताई आपत्ति
रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक अंतर्गत नकपुरा गांव में दर्री तालाब और चंडी मंदिर के समीप परिवहन अनुमति के नाम पर मुरूम उत्खनन की तैयारी का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित क्षेत्र में न तो मनरेगा के तहत कोई कार्य हुआ है और न ही वहां ओवरबर्डन मुरूम का भंडारण है। इसके बावजूद गलत जानकारी देकर उत्खनन की अनुमति लेने की कोशिश की जा रही है, जिस पर ग्रामीणों ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है।
UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l रायपुर जिले के आरंग ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले नकपुरा गांव में मुरूम उत्खनन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। गांव के दर्री तालाब और चंडी मंदिर के पास स्थित क्षेत्र में परिवहन अनुमति के नाम पर मुरूम उत्खनन की तैयारी किए जाने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित स्थान पर वर्षों से किसी प्रकार का रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) का कार्य नहीं हुआ है और न ही वहां किसी तरह की गहरीकरण प्रक्रिया संचालित की गई है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जिस स्थान से मुरूम परिवहन की अनुमति मांगी जा रही है, वहां किसी प्रकार का ओवरबर्डन या अतिरिक्त मुरूम का भंडारण मौजूद नहीं है। ऐसे में परिवहन अनुमति लेने के पीछे वास्तविक उद्देश्य मुरूम का उत्खनन करना बताया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन और प्रशासन को गलत एवं भ्रामक जानकारी देकर योजनाबद्ध तरीके से उत्खनन की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित क्षेत्र धार्मिक और सार्वजनिक महत्व का स्थान है, जहां दर्री तालाब और चंडी मंदिर स्थित हैं। ऐसे क्षेत्र में खनन गतिविधियों से पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने के साथ-साथ स्थानीय आस्था पर भी असर पड़ सकता है। इस कारण ग्रामीणों ने प्रस्तावित कार्रवाई पर गंभीर आपत्ति जताई है।
मामले को लेकर यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि संबंधित दस्तावेजों में तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक परिवहन अनुमति के नाम पर उत्खनन की प्रक्रिया को वैध स्वरूप देने की कोशिश की जा रही है। इस पूरे मामले में खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि आपत्तियां दर्ज कराए जाने के बावजूद अनुमति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित स्थल का निष्पक्ष जांच दल द्वारा भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी प्रकार की अनुमति जारी करने से पहले वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया जाए। उनका कहना है कि यदि तथ्यों की अनदेखी कर अनुमति प्रदान की गई तो क्षेत्र में अवैध उत्खनन को बढ़ावा मिलेगा और प्राकृतिक संसाधनों को नुकसान पहुंचेगा।
फिलहाल मामला ग्रामीणों की आपत्तियों और प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। अब सभी की निगाहें प्रशासन और खनिज विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि परिवहन अनुमति के नाम पर प्रस्तावित गतिविधि वास्तव में परिवहन है या फिर इसके पीछे उत्खनन की कोई बड़ी योजना छिपी हुई है।