झारखंड: महिला नक्सली अनिता किस्कू ने किया सरेंडर, पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर छोड़ी हिंसा की राह

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के बीच महिला नक्सली अनिता किस्कू उर्फ बबीता ने सरकार की पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर आत्मसमर्पण किया। पुलिस का कहना है कि संगठन के भीतर शोषण और लगातार चल रहे अभियान के कारण उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया।

Jul 22, 2026 - 14:02
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झारखंड: महिला नक्सली अनिता किस्कू ने किया सरेंडर, पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर छोड़ी हिंसा की राह

UNITED NEWS OF ASIA. झारखंड l झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान के तहत पुलिस को एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य और लंबे समय से वांछित महिला नक्सली अनिता किस्कू उर्फ बबीता ने आत्मसमर्पण कर हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया है। बताया गया कि झारखंड सरकार की "नई दिशा–एक नई पहल" पुनर्वास योजना से प्रभावित होकर उसने समाज की मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

गिरिडीह पुलिस कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान अनिता किस्कू ने पुलिस अधीक्षक और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आत्मसमर्पण किया। इस अवसर पर पुलिस अधिकारियों ने उसका स्वागत करते हुए सरकार की पुनर्वास नीति और उसके तहत मिलने वाली सुविधाओं की जानकारी दी। अधिकारियों ने कहा कि सरकार का उद्देश्य नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शांति स्थापित करना और भटके हुए युवाओं को सामान्य जीवन की ओर वापस लाना है।

पुलिस के अनुसार, अनिता किस्कू वर्ष 2009 में नक्सली संगठन से जुड़ी थी। समय के साथ वह भाकपा (माओवादी) की एरिया कमेटी सदस्य बनी और संगठन की विभिन्न गतिविधियों में सक्रिय रही। उसके खिलाफ झारखंड के कई थानों में हत्या के प्रयास, पुलिस पर हमला, विस्फोटक अधिनियम, गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए), आर्म्स एक्ट सहित कई गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संगठन के भीतर होने वाले शोषण, लगातार चल रहे नक्सल विरोधी अभियानों और सरकार की पुनर्वास नीति के सकारात्मक प्रभाव के कारण अनिता ने आत्मसमर्पण करने का निर्णय लिया। उसने हिंसा का रास्ता छोड़कर शांतिपूर्ण और सामान्य जीवन जीने की इच्छा व्यक्त की है।

अधिकारियों का मानना है कि इस आत्मसमर्पण से क्षेत्र में सक्रिय अन्य नक्सलियों को भी सकारात्मक संदेश मिलेगा। पुलिस को उम्मीद है कि सरकार की पुनर्वास योजनाओं और सुरक्षा बलों के लगातार अभियानों के चलते अधिक से अधिक नक्सली हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय लेंगे।

झारखंड सरकार लंबे समय से नक्सल प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों के साथ-साथ पुनर्वास योजनाओं पर विशेष जोर दे रही है। "नई दिशा–एक नई पहल" योजना का उद्देश्य आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को सम्मानजनक जीवन, रोजगार और पुनर्वास की सुविधाएं उपलब्ध कराना है, ताकि वे हिंसा छोड़कर समाज में नई शुरुआत कर सकें।

पुलिस का कहना है कि नक्सल विरोधी अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। साथ ही जो लोग हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं, उन्हें सरकार की पुनर्वास नीति के तहत हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। अधिकारियों ने विश्वास जताया कि अनिता किस्कू के आत्मसमर्पण से राज्य में शांति और विकास की दिशा में चल रहे प्रयासों को और मजबूती मिलेगी।