मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिला के मनेन्द्रगढ़ स्थित उप-जेल में पदस्थ प्रहरी संतोष तिवारी, जिन्हें ‘महाकाल’ के नाम से भी जाना जाता है, इन दिनों क्षेत्र में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
हाल ही में कुछ समाचार माध्यमों में ऐसी खबरें सामने आईं, जिनमें संतोष तिवारी को जेल में मानवीय दृष्टिकोण, संवेदनशील व्यवहार और बेहतर व्यवस्थाओं का प्रतीक बताया गया। खबरों में यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि वे कैदियों के साथ सम्मानजनक संवाद, स्वच्छता व्यवस्था और पौष्टिक भोजन जैसी सुविधाओं को लेकर विशेष रूप से सक्रिय हैं।
लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग होने का दावा सूत्र कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, यदि व्यवस्थाएं वास्तव में इतनी ही बेहतर हैं, तो अचानक इस तरह की आत्म-प्रशंसा वाली खबरों की आवश्यकता क्यों पड़ी? चर्चा है कि यह कवरेज किसी सुधारात्मक पहल से अधिक, व्यक्तिगत छवि सुधार की कवायद प्रतीत हो रही है।
सूत्र यह भी दावा कर रहे हैं कि जेल के भीतर अनुशासन के नाम पर कैदियों के साथ किया जाने वाला व्यवहार, सार्वजनिक रूप से दिखाई जा रही ‘संवेदनशीलता’ की छवि से मेल नहीं खाता। आरोप है कि संतोष तिवारी अपने रसूख और ‘महाकाल’ वाली पहचान के सहारे जेल परिसर में मनमानी करते हैं और आंतरिक शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।
इसी क्रम में यह भी सवाल उठ रहे हैं कि उप-जेल में गैर संवैधानिक अथवा प्रतिबंधित वस्तुएं किस तरह अंदर पहुंच रही हैं। सूत्रों के मुताबिक जेल परिसर में पार-सूत्र, हवाई चप्पल जैसी सामग्री को लेकर भी पहले आपत्तियां सामने आ चुकी हैं। इन मामलों में स्पष्ट जांच और जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग उठ रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि पूर्व में हुई विभागीय शिकायतें और आंतरिक असंतोष अब सार्वजनिक बहस का विषय बनते जा रहे हैं। खबरों में जिस तरह से स्वच्छता, भोजन व्यवस्था और मानवीय व्यवहार का गुणगान किया गया है, उसकी निष्पक्ष जांच होने पर वास्तविक स्थिति सामने आने की बात कही जा रही है।
एक स्थानीय सूत्र का कहना है, “जब कोई कर्मचारी स्वयं अपनी तारीफ के पुल बांधने लगे, तो यह आशंका स्वाभाविक है कि कहीं न कहीं कुछ छुपाने की कोशिश की जा रही है। उप-जेल मनेन्द्रगढ़ की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवाल केवल अफवाह नहीं, बल्कि अंदरूनी अव्यवस्था की गूंज भी हो सकते हैं।”
वहीं दूसरी ओर, संतोष तिवारी ने अपनी छवि को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि उन्हें बदनाम करने का प्रयास किया जा रहा है और उनके खिलाफ फैलाई जा रही बातें तथ्यहीन हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि उच्च अधिकारी इन सुर्खियों के पीछे की सच्चाई को गंभीरता से जांचेंगे या फिर यह मामला केवल चर्चाओं तक ही सीमित रह जाएगा। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि उप-जेल मनेन्द्रगढ़ में व्यवस्थाओं, कैदियों के साथ व्यवहार और प्रतिबंधित वस्तुओं की संभावित मौजूदगी को लेकर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति जनता के सामने आ सके।