निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ दुर्ग में बजरंग दल का प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

दुर्ग में निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी के खिलाफ बजरंग दल ने प्रदर्शन कर प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने अभिभावकों को राहत देने की मांग की है।

Apr 15, 2026 - 18:23
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निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ दुर्ग में बजरंग दल का प्रदर्शन, प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

UNITED NEWS OF ASIA.  रोहितास सिंह भुवाल, दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में निजी स्कूलों की कथित मनमानी के खिलाफ बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा। संगठन ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अभिभावकों को राहत देने की मांग उठाई है।

बजरंग दल के पदाधिकारियों ने शिक्षा मंत्री और जिला कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए आरोप लगाया कि निजी स्कूल लगातार अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ा रहे हैं। संगठन का कहना है कि हर साल फीस में वृद्धि की जा रही है, जिससे मध्यम और गरीब वर्ग के परिवारों पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि भीषण गर्मी के बावजूद स्कूल प्रबंधन बच्चों को अप्रैल की शुरुआत से ही स्कूल बुला रहा है, जिससे छोटे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि गर्मी के मौसम को देखते हुए स्कूलों के समय और संचालन में बदलाव किया जाना चाहिए।

बजरंग दल के अनुसार, निजी स्कूलों द्वारा हर वर्ष नई किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। इसके साथ ही यूनिफॉर्म और अन्य सामग्री भी निर्धारित दुकानों से ही खरीदने के लिए बाध्य किया जाता है, जिससे अभिभावकों की आर्थिक परेशानी और बढ़ जाती है।

संगठन ने यह भी मुद्दा उठाया कि जहां एक ओर स्कूल प्रबंधन मोटी फीस वसूल रहा है, वहीं दूसरी ओर शिक्षकों को अपेक्षाकृत कम वेतन दिया जा रहा है। इससे शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं।

प्रदर्शन के दौरान पदाधिकारियों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

बजरंग दल ने यह भी मांग की कि फीस वृद्धि पर नियंत्रण लगाया जाए, अनावश्यक खर्चों को रोका जाए और अभिभावकों को राहत देने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

इस प्रदर्शन में संगठन के कई कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए, जिन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और सुधार की मांग की।

अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या अभिभावकों को निजी स्कूलों की मनमानी से राहत मिल पाती है।