पेड़ की छांव में लगी बाल चौपाल से 2026 की सशक्त शुरुआत, बच्चों की आवाज़ को मिला मंच

साल 2026 की शुरुआत छत्तीसगढ़ में बच्चों के अधिकारों और सहभागिता को केंद्र में रखते हुए बाल चौपाल के आयोजन से हुई। ग्राम पंचायत लखोली में छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के नेतृत्व में पेड़ की छांव तले आयोजित इस बाल चौपाल में बच्चों ने खुलकर अपने विचार, समस्याएं और सपने साझा किए।

Jan 3, 2026 - 12:20
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पेड़ की छांव में लगी बाल चौपाल से 2026 की सशक्त शुरुआत, बच्चों की आवाज़ को मिला मंच

UNITED NEWS OF ASIA. अमृतेश्वर सिंह, रायपुर | साल 2026 की शुरुआत छत्तीसगढ़ में बच्चों के अधिकारों, सहभागिता और भविष्य निर्माण को लेकर एक प्रेरणादायी पहल बाल चौपाल के माध्यम से हुई। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत लखोली, विकासखंड आरंग में यह विशेष बाल चौपाल आयोजित की गई।

इस आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि बाल चौपाल पेड़ की छांव में खुले वातावरण में आयोजित की गई। प्रकृति के सान्निध्य में बैठे बच्चों ने बिना किसी डर, औपचारिकता या संकोच के अपनी बातें खुलकर रखीं। यह बाल चौपाल संवाद, संरक्षण और भविष्य की मजबूत जड़ों का प्रतीक बनकर उभरी।

बाल चौपाल के माध्यम से बच्चों को एक सुरक्षित, संवेदनशील, खुला और बालमैत्रीपूर्ण मंच प्रदान किया गया। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा स्वयं बच्चों के बीच बैठीं और उनसे सीधा संवाद किया। उन्होंने बच्चों के सवालों को गंभीरता से सुना और सरल, सहज व बालअनुकूल भाषा में उनके उत्तर और समाधान प्रस्तुत किए।

कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, पारिवारिक व्यवहार, पढ़ाई का दबाव, मोबाइल व इंटरनेट का संतुलित उपयोग, डिजिटल प्रभाव, करियर, सपने और भविष्य की चिंताओं जैसे अनेक महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार साझा किए। बच्चों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए रचनात्मक, ज्ञानवर्धक और मनोरंजक गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।

बाल चौपाल को संबोधित करते हुए डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि “पेड़ की छांव में बच्चों से संवाद करना केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि यह संदेश है कि बच्चों का भविष्य भी प्रकृति की तरह सुरक्षित, मजबूत और संवर्धित होना चाहिए। बाल चौपाल बच्चों की आवाज़ को सुनने और समझने का सशक्त माध्यम है।” उन्होंने कहा कि बच्चों के अधिकारों का वास्तविक संरक्षण संवाद, विश्वास और सहभागिता से ही संभव है।

डॉ. शर्मा ने यह भी स्पष्ट किया कि बच्चे केवल भविष्य के नागरिक नहीं, बल्कि वर्तमान के सजग, सोचने-समझने वाले और अधिकार-संपन्न नागरिक हैं। उनके विचारों और अधिकारों को सम्मान देना समाज, परिवार और शासन की सामूहिक जिम्मेदारी है।

छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग द्वारा आयोजित यह बाल चौपाल बच्चों के अधिकारों के संरक्षण और सशक्त भविष्य की दिशा में एक संवेदनशील और मजबूत पहल के रूप में सामने आई है। पेड़ की छांव में हुई यह बाल चौपाल आने वाले समय में बच्चों के उज्ज्वल, सुरक्षित और सशक्त भविष्य की प्रतीक बनेगी।