पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर सख्ती, 90 दिनों के लिए लागू हुआ नया कोटा सिस्टम

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की थोक खरीद पर नियंत्रण लगाने के लिए नया आदेश जारी किया है। अगले 90 दिनों तक बड़े उपभोक्ता रिटेल पेट्रोल पंपों से भारी मात्रा में ईंधन नहीं खरीद सकेंगे। सरकार का उद्देश्य ईंधन की आपूर्ति व्यवस्था को संतुलित रखना और अनियमित बिक्री पर रोक लगाना है।

Jun 13, 2026 - 13:28
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पेट्रोल-डीजल की थोक खरीद पर सख्ती, 90 दिनों के लिए लागू हुआ नया कोटा सिस्टम

UNITED NEWS OF ASIA. देश में पेट्रोल और डीजल की आपूर्ति व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने ‘मोटर स्पिरिट और हाई स्पीड डीजल आदेश, 2026’ जारी करते हुए रिटेल पेट्रोल पंपों से थोक मात्रा में ईंधन खरीदने पर सख्त प्रतिबंध लगा दिया है। यह व्यवस्था प्रारंभिक रूप से 90 दिनों के लिए लागू की गई है।

नए आदेश के अनुसार अब बड़े उपभोक्ता, संस्थान और व्यावसायिक इकाइयां सामान्य पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में पेट्रोल या डीजल नहीं खरीद सकेंगी। उन्हें अपनी जरूरत के ईंधन के लिए अधिकृत थोक बिक्री केंद्रों या स्वयं के उपभोक्ता पंपों का उपयोग करना होगा। सरकार का मानना है कि इससे ईंधन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी और नियंत्रित बनेगी।

आदेश के तहत पेट्रोल पंप संचालक किसी भी एक ग्राहक या वाहन को एक दिन में 200 लीटर से अधिक डीजल नहीं बेच सकेंगे। इस सीमा का उद्देश्य बड़ी मात्रा में ईंधन की खरीद और भंडारण को नियंत्रित करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह कदम कुछ क्षेत्रों में रिटेल पंपों पर असामान्य रूप से बढ़ी बिक्री और आपूर्ति संबंधी चिंताओं को देखते हुए उठाया गया है।

अब तक मॉल, अस्पताल, निजी बस ऑपरेटर, ट्रांसपोर्ट कंपनियां, बड़ी फैक्ट्रियां और अन्य व्यावसायिक संस्थान रिटेल पेट्रोल पंपों से बड़ी मात्रा में डीजल खरीद लेते थे। नए नियम लागू होने के बाद उन्हें केवल अधिकृत बल्क सेल पॉइंट्स से ही ईंधन प्राप्त करना होगा। इससे रिटेल पंपों पर आम उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की उपलब्धता प्रभावित नहीं होगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के बीच सरकार ईंधन वितरण प्रणाली को अधिक नियंत्रित और संतुलित रखना चाहती है। इसके साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों को होने वाले संभावित राजस्व नुकसान को रोकने में भी यह कदम मददगार साबित हो सकता है।

सरकार ने कहा है कि आदेश के प्रभाव का नियमित मूल्यांकन किया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आगे की रणनीति तय की जाएगी। फिलहाल आम वाहन चालकों और घरेलू उपभोक्ताओं पर इस निर्णय का कोई प्रत्यक्ष प्रभाव नहीं पड़ेगा। वे पहले की तरह सामान्य पेट्रोल पंपों से अपनी जरूरत के अनुसार पेट्रोल और डीजल खरीद सकेंगे।

नई व्यवस्था से ईंधन आपूर्ति तंत्र में पारदर्शिता बढ़ने, अनावश्यक भंडारण पर रोक लगने और आवश्यक सेवाओं के लिए ईंधन की उपलब्धता सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार ने सभी संबंधित संस्थानों और ईंधन विक्रेताओं से नए नियमों का पालन करने की अपील की है।