फर्जी सीमांकन के विरोध में 75 वर्षीय किसान ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

गरियाबंद जिले के छुरा तहसील अंतर्गत ग्राम टेंगनाबासा के 75 वर्षीय किसान लालाराम ध्रुव ने भूमि के कथित फर्जी सीमांकन और कब्जे के विरोध में प्रशासन को आमरण अनशन की चेतावनी दी है। किसान ने निष्पक्ष जांच और पुनः सीमांकन की मांग की है।

Jun 13, 2026 - 13:15
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फर्जी सीमांकन के विरोध में 75 वर्षीय किसान ने दी आमरण अनशन की चेतावनी

UNITED NEWS OF ASIA.  गरियाबंद l गरियाबंद जिले के छुरा तहसील क्षेत्र के ग्राम टेंगनाबासा में भूमि सीमांकन को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। गांव के 75 वर्षीय किसान लालाराम ध्रुव ने अपनी भूमि के कथित फर्जी सीमांकन के विरोध में प्रशासन को आमरण अनशन की चेतावनी दी है। किसान का आरोप है कि राजस्व विभाग द्वारा उनकी भूमि का सीमांकन बिना सूचना दिए और निर्धारित नियमों का पालन किए बिना कर दिया गया, जिससे उनकी जमीन पर कब्जा हो गया।

लालाराम ध्रुव ने तहसीलदार छुरा को सौंपे आवेदन में बताया है कि उनकी भूमि खसरा नंबर 438, रकबा 0.1000 हेक्टेयर का सीमांकन 5 दिसंबर 2025 को किया गया था। उनका कहना है कि सीमांकन की प्रक्रिया के दौरान उन्हें किसी प्रकार की सूचना नहीं दी गई। उनकी अनुपस्थिति में उनके पुत्र को बुलाकर पूरी कार्रवाई संपन्न कर ली गई, जबकि भूमि स्वामी होने के नाते उन्हें प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए था।

किसान ने सीमांकन पंचनामा में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि दस्तावेजों में गवाहों के कथित रूप से फर्जी हस्ताक्षर किए गए हैं। उनका दावा है कि गांव के ही एक व्यक्ति ने राजस्व अमले को बुलाकर सीमांकन कराया और बाद में उसी भूमि पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निर्माण कार्य भी कर लिया गया।

लालाराम ध्रुव का कहना है कि पूरी सीमांकन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने मांग की है कि सीमांकन पंचनामा में दर्ज गवाहों के बयान लिए जाएं और वास्तविक स्थिति की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। किसान का आरोप है कि इस मामले में राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है।

पीड़ित किसान के पुत्र यशवंत कुमार ध्रुव ने भी प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि परिवार लगातार न्याय के लिए प्रयास कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो परिवार आंदोलन के लिए मजबूर होगा।

किसान ने बताया कि इस मामले में उन्होंने 16 फरवरी 2026 और 23 अप्रैल 2026 को भी पुनः सीमांकन कराने के लिए आवेदन दिया था, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इससे निराश होकर उन्होंने 11 जून 2026 को एक और आवेदन सौंपते हुए चेतावनी दी है कि यदि एक सप्ताह के भीतर पुनः सीमांकन नहीं कराया गया तो वे तहसील कार्यालय छुरा के सामने आमरण अनशन शुरू करेंगे।

आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अनशन के दौरान किसी प्रकार की अप्रिय घटना घटित होने पर उसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस संबंध में छुरा तहसीलदार मयंक अग्रवाल से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हो सकी थी।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासन किसान की शिकायत पर क्या कदम उठाता है और विवादित सीमांकन की निष्पक्ष जांच कब तक पूरी होती है।