जर्जर स्कूलों में पढ़ाई की तैयारी, रंगमंच और सामुदायिक भवनों में लगेगी कक्षाएं

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में नए शिक्षा सत्र की शुरुआत से पहले शिक्षा व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने आई है। जिले के कई स्कूल जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं, जबकि अनेक स्थानों पर रंगमंच, सामुदायिक भवन और आंगनबाड़ी केंद्रों में कक्षाएं लगाई जा रही हैं।

Jun 13, 2026 - 13:12
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जर्जर स्कूलों में पढ़ाई की तैयारी, रंगमंच और सामुदायिक भवनों में लगेगी कक्षाएं

UNITED NEWS OF ASIA जावेद शेख, मानपुर l लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 16 जून से नए शिक्षा सत्र के संचालन के निर्देश जारी किए जा चुके हैं, लेकिन मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी जिले में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है। जिले के अनेक विद्यालय आज भी जर्जर भवनों, सामुदायिक भवनों, आंगनबाड़ी केंद्रों और गांवों के रंगमंचों में संचालित हो रहे हैं। ऐसे में शाला प्रवेश उत्सव के साथ बच्चों की पढ़ाई शुरू होने जा रही है, लेकिन सुरक्षित और पर्याप्त शैक्षणिक भवनों का अभाव अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में दो दर्जन से अधिक प्राथमिक और माध्यमिक विद्यालय अत्यंत जर्जर स्थिति में हैं। इन भवनों को डिस्मेंटल योग्य माना जा चुका है, बावजूद इसके वर्षों से इन्हीं भवनों में छात्र-छात्राओं की पढ़ाई कराई जा रही है। नए शिक्षा सत्र में एक बार फिर इन जर्जर भवनों में बच्चों के बैठने की तैयारी की जा रही है।

मानपुर विकासखंड में माध्यमिक शाला तोलूम, प्राथमिक शाला दोरदे, तेरेगांव, बंसेली, हुरेली, चाहचीगुडरा और घोड़ागांव जैसे विद्यालयों की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। इन भवनों की जर्जर अवस्था के बावजूद शिक्षा विभाग के सामने वैकल्पिक व्यवस्था का अभाव होने से यहां पढ़ाई जारी रखना मजबूरी बन गया है।

जिले के कई गांवों में विद्यालय भवन उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों की कक्षाएं सामुदायिक भवनों, रंगमंचों और आंगनबाड़ी केंद्रों में संचालित की जा रही हैं। मानपुर विकासखंड के आलकन्हार में प्राथमिक शाला गांव के रंगमंच में संचालित होती है, जबकि नवागांव में प्राथमिक शाला मिडिल स्कूल भवन में चल रही है। मोरचुल मासूल में आंगनबाड़ी केंद्र को कक्षा के रूप में उपयोग किया जा रहा है। इसी तरह घोड़ाझरी, कोहका, रानवाही, राजकट्टा, अमलीडीह, बिरसिगंटोला, मारी और कौड़ीकसा सहित कई गांवों में वैकल्पिक भवनों में बच्चों की पढ़ाई हो रही है।

विशेष रूप से कौड़ीकसा गांव का विद्यालय सामुदायिक भवन में संचालित हो रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस क्षेत्र में बेहतर शिक्षा की सबसे अधिक आवश्यकता है, वहीं बुनियादी शैक्षणिक सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। आदिवासी बहुल इस क्षेत्र में वर्षों से शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की मांग उठती रही है, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हो सका है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारें बदलती रहीं, योजनाएं बनती रहीं, लेकिन जिले के कई स्कूलों की दशा आज भी नहीं बदल पाई है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि नक्सल प्रभावित और आदिवासी क्षेत्रों के विकास में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, लेकिन इसके लिए सुरक्षित और पर्याप्त विद्यालय भवन आवश्यक हैं।

जिले के तीनों विकासखंडों के शिक्षा अधिकारियों ने बताया कि जर्जर एवं भवनविहीन स्कूलों की जानकारी शासन को भेजी जा चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि जब तक नए भवन स्वीकृत नहीं होते, तब तक उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय व्यवस्थाओं के माध्यम से स्कूलों का संचालन करना विभाग की मजबूरी है। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि आने वाले समय में इन स्कूलों के लिए स्थायी समाधान उपलब्ध कराया जाएगा।