IPS अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने पदोन्नति में भेदभाव का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री से की शिकायत Slug:

छत्तीसगढ़ के IPS अधिकारी एवं कवर्धा पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने पदोन्नति में कथित भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखा है। अधिकारी का कहना है कि नियमों के बावजूद उन्हें जानबूझकर DIG पद पर पदोन्नति से वंचित किया गया।

Jan 28, 2026 - 16:12
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IPS अधिकारी धर्मेंद्र सिंह छवई ने पदोन्नति में भेदभाव का लगाया आरोप, मुख्यमंत्री से की शिकायत  Slug:

UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा। छत्तीसगढ़ पुलिस महकमे में पदोन्नति को लेकर एक गंभीर और संवेदनशील मामला सामने आया है। भारतीय पुलिस सेवा (IPS) 2012 बैच के अधिकारी एवं कवर्धा जिले के पुलिस अधीक्षक धर्मेंद्र सिंह छवई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर अपने साथ हुए कथित अन्याय, भेदभाव और संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत की है। इस पत्र ने पुलिस विभाग की पदोन्नति प्रक्रिया पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आईपीएस अधिकारी छवई ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि पुलिस मुख्यालय द्वारा 10 अक्टूबर 2024, 31 दिसंबर 2024, 26 मई 2025 और 31 जुलाई 2025 को जारी की गई पदोन्नति सूचियों में उनके नाम पर विचार किया गया, लेकिन उन्हें वरिष्ठ वेतनमान एवं उप पुलिस महानिरीक्षक (DIG) पद पर पदोन्नत नहीं किया गया। अधिकारियों द्वारा इसका कारण लोकायुक्त संगठन, भोपाल में लंबित जांच को बताया गया।

हालांकि, अधिकारी का कहना है कि उनके खिलाफ न तो कोई चार्जशीट जारी की गई है और न ही कोई विभागीय या आपराधिक मामला न्यायालय में लंबित है। इसके बावजूद उन्हें पदोन्नति से वंचित किया गया, जबकि समान या उससे अधिक गंभीर आरोपों का सामना कर रहे अन्य अधिकारियों को पदोन्नति का लाभ दे दिया गया।

अपने पत्र में IPS अधिकारी ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 15 जनवरी 1999 को जारी पदोन्नति नियमों का हवाला दिया है, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अधिकारी निलंबित नहीं है, उसके खिलाफ आरोप पत्र जारी नहीं हुआ है और न्यायालय में कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है, तो उसे पदोन्नति से रोका नहीं जा सकता।

धर्मेंद्र सिंह छवई ने इस पूरे मामले को भारतीय संविधान के अनुच्छेद-16 के तहत समान अवसर के अधिकार का उल्लंघन बताया है। उन्होंने लिखा है कि इस भेदभावपूर्ण रवैये से न केवल उनका मनोबल गिरा है, बल्कि पुलिस विभाग की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े हुए हैं।

अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार इस मामले में क्या रुख अपनाती है और क्या एक वरिष्ठ IPS अधिकारी को न्याय और उसका संवैधानिक अधिकार मिल पाता है या नहीं।