अब ‘राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय’ के नाम से जाना जाएगा खैरागढ़ का संगीत विवि, 17वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने किया ऐलान

खैरागढ़ स्थित इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय का नाम बदलकर अब ‘राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़’ कर दिया गया है। 17वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल रमेन डेका ने इसकी ऐतिहासिक घोषणा की।

Jan 28, 2026 - 16:27
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अब ‘राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय’ के नाम से जाना जाएगा खैरागढ़ का संगीत विवि, 17वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल ने किया ऐलान

UNITED NEWS OF ASIA. खैरागढ़। कला और संगीत की नगरी खैरागढ़ में स्थित प्रसिद्ध इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय के इतिहास में एक नया और गौरवशाली अध्याय जुड़ गया है। चार वर्षों के लंबे अंतराल के बाद आयोजित 17वें दीक्षांत समारोह में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने एक ऐतिहासिक घोषणा करते हुए कहा कि अब यह विश्वविद्यालय “राजकुमारी इंदिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़” के नाम से जाना जाएगा। इस घोषणा के बाद पूरे समारोह स्थल में उत्साह और गर्व का वातावरण देखने को मिला।

राज्यपाल रमेन डेका ने नाम परिवर्तन के पीछे की भावनात्मक पृष्ठभूमि को साझा करते हुए कहा कि यह निर्णय विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक मूल्यों को सम्मान देने के उद्देश्य से लिया गया है। उन्होंने बताया कि संगीत प्रेमी राजकुमारी इंदिरा सिंह के असामयिक निधन के बाद खैरागढ़ के तत्कालीन राजा ने अपनी पुत्री की स्मृति में राजमहल दान कर इस विश्वविद्यालय की स्थापना की थी। यह संस्था आज भी त्याग, कला और समर्पण की मिसाल बनी हुई है।

राज्यपाल ने आश्वासन दिया कि नाम परिवर्तन से जुड़ी सभी प्रशासनिक औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर ली जाएंगी, ताकि विश्वविद्यालय को उसके नए नाम से आधिकारिक पहचान मिल सके।

इस गरिमामय दीक्षांत समारोह में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कुल 232 छात्र-छात्राओं को स्वर्ण पदक, 4 को रजत पदक प्रदान किए गए। इसके अलावा 5 शोधार्थियों को डी.लिट (D.Litt) और 64 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि से सम्मानित किया गया।

खैरागढ़ का यह विश्वविद्यालय एशिया का इकलौता ऐसा कला विश्वविद्यालय है, जहाँ संगीत, नृत्य और ललित कलाओं की विधिवत उच्च शिक्षा दी जाती है। भारतीय शास्त्रीय संगीत और कला के क्षेत्र में इस संस्थान ने देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशिष्ट पहचान बनाई है।

इस ऐतिहासिक अवसर पर उच्च शिक्षा मंत्री टंकराम वर्मा, धरसीवा विधायक एवं पद्मश्री अनुज शर्मा, खैरागढ़ राजपरिवार के महाराज आर्यव्रत सिंह, कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चन्द्रवाल सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह विश्वविद्यालय आज भी एक पिता के अपनी पुत्री के प्रति प्रेम और कला के प्रति समर्पण का जीवंत प्रतीक बना हुआ है।