चितरंगी में पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू, तहसील में जमा किए अभिलेख और बस्ते
सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील में मध्यप्रदेश पटवारी संघ के आह्वान पर पटवारियों ने अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। पहले दिन पटवारियों ने तहसील कार्यालय में अभिलेख और बस्ते जमा कर अपनी पांच सूत्रीय मांगों के समर्थन में आंदोलन तेज किया।
UNITED NEWS OF ASIA. आदर्श तिवारी, सिंगरौली l मध्यप्रदेश पटवारी संघ के प्रदेशव्यापी आह्वान पर सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील में पटवारियों ने मंगलवार से अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी। आंदोलन के पहले दिन पटवारियों ने अपने अभिलेख और बस्ते तहसील कार्यालय में जमा करते हुए तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। संघ का कहना है कि लंबे समय से लंबित पांच सूत्रीय मांगों पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, जिसके चलते उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
हड़ताल के तहत पटवारियों ने नियमित राजस्व कार्यों से खुद को अलग कर दिया है। इससे चितरंगी तहसील क्षेत्र में नामांतरण, सीमांकन, फसल गिरदावरी, राजस्व अभिलेखों की नकल, भूमि संबंधी प्रमाण-पत्र और अन्य महत्वपूर्ण राजस्व सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। आम नागरिकों को अपने दैनिक राजस्व कार्यों के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पटवारी संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से अपनी मांगों को शासन के समक्ष रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनका समाधान नहीं किया गया। इसी कारण प्रदेश स्तर पर अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल का निर्णय लिया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
हड़ताल के दौरान पटवारी संघ के ब्लॉक अध्यक्ष हरि सिंह सहित राममिलन सिंह, रमाशंकर बैस, प्रभांशु कमल, सतीश चंद्र, गौरव, सौरभ सिंह और अन्य पटवारी मौजूद रहे। सभी ने एकजुट होकर आंदोलन को सफल बनाने का संकल्प लिया और शासन से जल्द वार्ता कर मांगों का समाधान करने की अपील की।
राजस्व विभाग के कई महत्वपूर्ण कार्य पटवारियों पर निर्भर होते हैं। ऐसे में यदि हड़ताल लंबी चली तो किसानों, भू-स्वामियों और आम नागरिकों को विभिन्न राजस्व सेवाओं के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। विशेष रूप से भूमि संबंधी मामलों के लंबित होने से प्रशासनिक कार्य भी प्रभावित होने की आशंका है।
फिलहाल तहसील प्रशासन की ओर से हड़ताल को लेकर स्थिति पर नजर रखी जा रही है। वहीं पटवारी संघ का कहना है कि आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और शासन से सकारात्मक पहल होने पर ही आगे की रणनीति तय की जाएगी। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और पटवारी संघ के बीच बातचीत कब होती है और आंदोलन का समाधान किस तरह निकलता है।