लाल सागर में बढ़ते तनाव पर भारत चिंतित, बाब अल-मन्दब में नौवहन को खतरे की आशंका

लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा तनाव के बीच भारत ने चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा में हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि नागरिकों और आर्थिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाने वाली घटनाएं क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता को प्रभावित करती हैं। भारत ने बाब अल-मन्दब से होकर होने वाली स्वतंत्र और सुरक्षित समुद्री आवाजाही पर भी संभावित असर को लेकर चिंता व्यक्त की है।

Sep 18, 2026 - 20:16
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लाल सागर में बढ़ते तनाव पर भारत चिंतित, बाब अल-मन्दब में नौवहन को खतरे की आशंका

UNITED NEWS OF ASIA. लाल सागर क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा तनाव को लेकर भारत ने गंभीर चिंता जताई है। 18 सितंबर 2026 को विदेश मंत्रालय की नियमित मीडिया ब्रीफिंग के दौरान प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने क्षेत्र में बढ़ती हिंसक गतिविधियों पर भारत की स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभु सीमा में हुए हमलों की निंदा करते हुए कहा कि नागरिकों और आर्थिक परिसंपत्तियों को निशाना बनाने वाली ऐसी घटनाएं क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। भारत ने संघर्ष वाले क्षेत्र में जल्द शांति और स्थिरता बहाल होने की उम्मीद जताई है।

जायसवाल ने कहा कि भारत लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति में हो रहे बदलावों को लेकर गहराई से चिंतित है। उनके मुताबिक सऊदी अरब के इलाकों में हुए हमलों और क्षेत्र में बढ़ते तनाव का प्रभाव केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि इससे व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा वातावरण भी प्रभावित हो सकता है। विदेश मंत्रालय ने नागरिकों और आर्थिक ढांचे को निशाना बनाने वाली घटनाओं को लेकर भारत की आपत्ति दोहराई है। भारत ने इससे पहले भी सऊदी अरब की संप्रभु सीमा पर हुए हमलों की निंदा की थी।

भारत की चिंता का एक प्रमुख कारण बाब अल-मन्दब जलडमरूमध्य भी है। यह समुद्री मार्ग लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विदेश मंत्रालय के अनुसार क्षेत्र में जारी हमले और तनाव इस मार्ग से होने वाली स्वतंत्र आवाजाही के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। जायसवाल ने कहा कि ऐसी परिस्थितियां क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को प्रभावित करने के साथ समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता पर भी असर डाल सकती हैं।

लाल सागर और बाब अल-मन्दब की स्थिति का असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है। यह मार्ग एशिया, मध्य पूर्व, यूरोप और अफ्रीका के बीच समुद्री परिवहन के लिए महत्वपूर्ण है। यदि सुरक्षा संबंधी जोखिमों के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो व्यापारिक मार्गों, परिवहन समय और आपूर्ति शृंखलाओं पर दबाव बढ़ सकता है। भारत के लिए भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश का अंतरराष्ट्रीय व्यापार समुद्री मार्गों पर काफी निर्भर करता है। हालांकि किसी विशेष व्यापारिक प्रभाव का आकलन परिस्थितियों और समुद्री आवाजाही में आने वाले वास्तविक व्यवधान पर निर्भर करेगा।

विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में शांति और स्थिरता की जल्द बहाली की उम्मीद जताई है। भारत की ओर से यह भी कहा गया है कि वह राजनयिक माध्यमों से क्षेत्र की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। मौजूदा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लाल सागर क्षेत्र में सुरक्षा तनाव लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय बना हुआ है।

भारत की ओर से दिए गए बयान में मुख्य रूप से नागरिकों की सुरक्षा, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर निर्बाध आवाजाही के महत्व को रेखांकित किया गया है। आने वाले समय में लाल सागर क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और संबंधित पक्षों के बीच तनाव का स्तर यह तय करेगा कि बाब अल-मन्दब और आसपास के समुद्री मार्गों पर इसका वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।