श्रमिक योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर सुशील सन्नी अग्रवाल ने सरकार पर उठाए सवाल

छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए बड़ी संख्या में श्रमिकों के आवेदन लंबित होने का दावा किया है। उन्होंने ई-केवाईसी, श्रम संसाधन केंद्रों और कुछ चॉइस सेंटरों की कार्यप्रणाली की जांच की मांग करते हुए लंबित आवेदनों के शीघ्र निराकरण की मांग की।

Sep 19, 2026 - 19:53
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श्रमिक योजनाओं के लंबित आवेदनों को लेकर सुशील सन्नी अग्रवाल ने सरकार पर उठाए सवाल

UNITED NEWS OF ASIA. हसीब अख्तर, रायपुर l छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल के पूर्व अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल ने श्रमिक कल्याण योजनाओं से जुड़े लंबित आवेदनों को लेकर प्रदेश सरकार और श्रम विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि वर्तमान व्यवस्था में बड़ी संख्या में श्रमिक विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हैं। उन्होंने सरकार से लंबित आवेदनों की स्थिति सार्वजनिक करने और विशेष अभियान चलाकर उनका निराकरण करने की मांग की है।

अग्रवाल ने दावा किया कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में कर्मकार मंडल की करीब 30 जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ पंजीकृत श्रमिकों को समय पर मिल रहा था। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था में विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में आवेदन लंबित हैं। उन्होंने रायपुर में 86,812, धमतरी में 80,009, दुर्ग में 43,556, महासमुंद में 22,346 और गरियाबंद में 26,194 लंबित आवेदनों का आंकड़ा बताते हुए प्रदेश में कुल 12,20,620 आवेदन लंबित होने का दावा किया।

उन्होंने योजनावार लंबित आवेदनों का भी उल्लेख किया। अग्रवाल के अनुसार नौनिहाल छात्रवृत्ति योजना में 3,56,556 तथा बच्चों के गणवेश एवं पुस्तक-कॉपी योजना में 1,67,922 आवेदन लंबित हैं। उन्होंने विभिन्न योजनाओं में कुल 6,10,310 आवेदन लंबित होने का दावा किया। अग्रवाल ने कहा कि उनके द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों की सरकार स्वयं जांच करा सकती है और वास्तविक स्थिति सामने रख सकती है।

ई-केवाईसी प्रक्रिया को लेकर भी अग्रवाल ने श्रमिकों की परेशानियों का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस प्रक्रिया का उद्देश्य योजनाओं से जुड़े लाभार्थियों की जानकारी को व्यवस्थित और सत्यापित करना है, वह कई श्रमिकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है। उन्होंने श्रम संसाधन केंद्रों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इन केंद्रों का उद्देश्य श्रमिकों को योजनाओं से संबंधित जानकारी और सुविधा उपलब्ध कराना है।

अग्रवाल ने कुछ चॉइस सेंटरों और श्रम विभाग के अधिकारियों के बीच कथित मिलीभगत का आरोप लगाते हुए इन दावों की निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि श्रमिकों को योजनाओं का लाभ लेने के लिए अनावश्यक रूप से अलग-अलग स्थानों पर भटकना न पड़े, इसके लिए प्रक्रिया को सरल और पारदर्शी बनाया जाना चाहिए।

पूर्व कर्मकार मंडल अध्यक्ष ने यह भी आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार जिन योजनाओं को अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित कर रही है, उनमें से कई योजनाएं पहले ही शुरू की जा चुकी थीं और बाद में उनके नाम या स्वरूप में बदलाव किया गया। उन्होंने श्रम मंत्री की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए विभागीय योजनाओं और लंबित आवेदनों की स्थिति पर जवाब देने की मांग की।

अग्रवाल ने कहा कि पूर्ववर्ती व्यवस्था में पंजीयन के 90 दिनों बाद कई योजनाओं का लाभ मिलने की व्यवस्था थी, जबकि वर्तमान व्यवस्था में कुछ योजनाओं के लिए लंबी पात्रता अवधि निर्धारित किए जाने से श्रमिकों को लाभ के लिए अधिक समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। उन्होंने सरकार से जिलावार और योजनावार विशेष अभियान चलाकर लंबित आवेदनों का निराकरण करने की मांग की।

अग्रवाल ने कहा कि श्रमिकों से जुड़े मामलों को राजनीतिक विवाद तक सीमित रखने के बजाय सरकार को उपलब्ध आंकड़ों की जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पात्र श्रमिकों को योजनाओं का लाभ समय पर मिले और आवेदन प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं को दूर किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का समाधान जल्द नहीं हुआ तो कांग्रेस श्रमिकों के अधिकारों को लेकर आंदोलन करेगी।