IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अजीत डोभाल बोले- पिछले 1,000 सालों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी हैं आज के युवा

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि मौजूदा पीढ़ी के सामने पहले की तुलना में अधिक अवसर हैं। उन्होंने अपने शुरुआती इंटेलिजेंस करियर से जुड़ा सिक्किम का अनुभव भी साझा किया। समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने छात्रों से आजादी और लोकतंत्र के महत्व को समझने की अपील की।

Sep 19, 2026 - 19:28
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IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में अजीत डोभाल बोले- पिछले 1,000 सालों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी हैं आज के युवा

UNITED NEWS OF ASIA. रुड़की। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल शनिवार को IIT रुड़की के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने संस्थान से डिग्री हासिल करने वाले छात्रों को संबोधित करते हुए मौजूदा पीढ़ी को पिछले 1,000 वर्षों की सबसे भाग्यशाली पीढ़ी बताया। उन्होंने कहा कि आज के युवा ऐसे समय में अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत कर रहे हैं, जब दुनिया में तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही है और उनके सामने अवसरों की संख्या भी बढ़ी है।

IIT रुड़की के दो दिवसीय दीक्षांत समारोह में कुल 2,701 छात्रों को डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि गेस्ट ऑफ ऑनर के तौर पर मौजूद रहे। अपने संबोधन में डोभाल ने कहा कि पिछली पीढ़ियों को कई तरह की कठिन परिस्थितियों, संघर्ष और सीमित अवसरों का सामना करना पड़ा था। उनके मुताबिक, आज परिस्थितियां काफी बदली हैं और युवाओं के सामने शिक्षा, तकनीक तथा नए क्षेत्रों में आगे बढ़ने के व्यापक अवसर मौजूद हैं।

डोभाल ने अपने इंटेलिजेंस करियर के शुरुआती दौर का एक अनुभव भी छात्रों के साथ साझा किया। उन्होंने सिक्किम से जुड़े एक मिशन का उल्लेख करते हुए बताया कि उस समय वह युवा IPS अधिकारी थे और इंटेलिजेंस से जुड़े काम में नए थे। उनके अनुसार, उस समय सिक्किम भारत का हिस्सा बनने की प्रक्रिया में था और उनकी जिम्मेदारियों में सीमा क्षेत्रों की निगरानी के साथ चीनी सेना और PLA की गतिविधियों से जुड़ी सूचनाएं जुटाना भी शामिल था।

उन्होंने बताया कि एक बार सीमा क्षेत्र में भेजी गई एक इंटेलिजेंस टीम निर्धारित समय पर वापस नहीं लौटी। डोभाल के अनुसार, टीम के लौटने की उम्मीद कुछ दिनों में थी, लेकिन कई दिन बीतने के बाद भी उसका कोई पता नहीं चला। उन्होंने कहा कि यह स्थिति उनके लिए पेशेवर और मानवीय दोनों स्तरों पर चिंता का विषय बन गई थी। बाद में उन्हें मुख्यालय से जानकारी मिली कि टीम को चीनी पक्ष ने हिरासत में लेकर पूछताछ की थी और बातचीत के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया।

डोभाल ने बताया कि टीम की वापसी के बाद इस मामले की जांच शुरू हुई और उस समय उन्हें लगा कि यह घटना उनके करियर के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। हालांकि, उनके अनुसार जांच में उनकी ओर से कोई कमी नहीं पाई गई। उन्होंने कहा कि मुख्यालय से उपलब्ध कराए गए स्केच और नक्शों में कुछ कमियां और गलतियां थीं, जिनकी वजह से मिशन में समस्या पैदा हुई थी। डोभाल ने इस अनुभव को अपने शुरुआती करियर की महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक के रूप में साझा किया।

NSA ने IIT रुड़की की ऐतिहासिक विरासत की भी सराहना की। उन्होंने छात्रों की शिक्षा और उनके विकास में योगदान देने वाले शिक्षकों और अभिभावकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने युवाओं को बदलती दुनिया में तकनीक के महत्व को समझने और उपलब्ध अवसरों का उपयोग करने पर जोर दिया।

दीक्षांत समारोह में वरिष्ठ अधिवक्ता हरीश साल्वे ने भी छात्रों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि युवा ऐसी दुनिया में प्रवेश कर रहे हैं, जो तेजी से खुद को नए रूप में ढाल रही है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में हो रहे बदलावों का उल्लेख करते हुए छात्रों से आजादी और लोकतंत्र के महत्व को समझने की अपील की। साल्वे ने कहा कि तकनीक आने वाले समय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और नई दुनिया के निर्माण में युवाओं की जिम्मेदारी भी बड़ी होगी।

समारोह में IIT रुड़की के निदेशक केके पंत सहित संस्थान के शिक्षक, अधिकारी, छात्र और उनके अभिभावक मौजूद रहे। दो दिवसीय आयोजन के दौरान विभिन्न पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को उनकी डिग्रियां प्रदान की गईं और उनके शैक्षणिक सफर के अगले चरण की शुरुआत हुई।