‘PM केयर्स फंड की जांच करो, पीएम माफ कर देंगे’, RTI एक्टिविस्ट पर CJP का तीखा पलटवार

कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी फंडिंग और संस्थापक अभिजीत दिपके से जुड़े आरोपों पर पलटवार करते हुए आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी की शिकायतों को राजनीतिक प्रेरित बताया। पार्टी की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने कहा कि यदि पारदर्शिता की बात हो रही है तो पीएम केयर्स फंड की भी जांच होनी चाहिए। फिलहाल शिकायतों पर संबंधित एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

Aug 3, 2026 - 16:04
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‘PM केयर्स फंड की जांच करो, पीएम माफ कर देंगे’, RTI एक्टिविस्ट पर CJP का तीखा पलटवार

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। कॉकरेच जनता पार्टी (CJP) ने अपनी फंडिंग, संगठन के कानूनी दर्जे और संस्थापक अभिजीत दिपके से जुड़े आरोपों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी ने आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी द्वारा विभिन्न सरकारी संस्थाओं को भेजी गई शिकायतों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए खारिज किया है। साथ ही पारदर्शिता के मुद्दे पर पीएम केयर्स फंड की भी जांच कराने की मांग उठाई है।

दरअसल, सूरत निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट अमित तिवारी ने 1 अगस्त को भारत निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी और महाराष्ट्र सरकार सहित कई सरकारी संस्थानों को शिकायत भेजी थी। शिकायत में CJP की फंडिंग, उसके कानूनी दर्जे तथा पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके और उनके पिता भगवानराव दिपके की आर्थिक स्थिति की जांच की मांग की गई थी।

शिकायत में यह भी कहा गया कि वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल द्वारा घोषित एक करोड़ रुपये के लीगल डिफेंस फंड पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाए जाने के पहलू की भी जांच की जानी चाहिए। इन मांगों के बाद राजनीतिक हलकों में इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई।

इन शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए CJP की प्रवक्ता वैष्णवी गौर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा किया। उन्होंने कहा कि किसी निजी व्यक्ति की शिक्षा और पारिवारिक खर्च को राजनीतिक विवाद का विषय बनाना उचित नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग चुनिंदा व्यक्तियों और संगठनों को निशाना बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

वैष्णवी गौर ने कहा कि यदि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात की जा रही है तो सभी मामलों में समान मापदंड अपनाए जाने चाहिए। इसी संदर्भ में उन्होंने पीएम केयर्स फंड की जांच का भी जिक्र करते हुए टिप्पणी की कि "पीएम माफ कर देंगे, चिंता मत करो।"

पार्टी का कहना है कि उसकी फंडिंग और कानूनी स्थिति को लेकर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से अधिक राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा हैं। CJP ने दावा किया कि संगठन कानून के दायरे में काम कर रहा है और उसके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं।

दूसरी ओर, शिकायतकर्ता अमित तिवारी ने संबंधित सरकारी एजेंसियों से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक जीवन और राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े संगठनों की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित होना आवश्यक है।

फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग, सीबीआईसी, महाराष्ट्र सरकार या अन्य संबंधित सरकारी एजेंसियों की ओर से इन शिकायतों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच संबंधी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित एजेंसियां इन शिकायतों पर आगे क्या निर्णय लेती हैं।

वर्तमान में यह मामला आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित है। शिकायतों और जवाबों में किए गए दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आधिकारिक निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।