यह मामला वर्ष 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा के बाद राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों से जुड़े मामलों की न्यायिक निगरानी का हिस्सा है। सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त 2023 में जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति गठित की थी। समिति को हिंसा के दौरान महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा की परिस्थितियों की जानकारी जुटाने के साथ पीड़ितों के लिए राहत, पुनर्वास, चिकित्सा और मनोवैज्ञानिक सहायता से जुड़े उपायों पर रिपोर्ट देने की जिम्मेदारी दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष राहत शिविरों में हुई मौतों को लेकर समिति से मिली जानकारी का भी उल्लेख किया गया। अदालत ने राज्य सरकार से यह स्पष्ट करने को कहा कि संदिग्ध मौतों के मामलों में अब तक क्या जांच की गई है और आपराधिक कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। साथ ही राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी मांगी गई है।
सुनवाई के दौरान पोस्टमार्टम से जुड़े मामलों पर भी सवाल उठाए गए। अदालत ने यह जानना चाहा कि रिपोर्ट में सामने आए मामलों में पोस्टमार्टम और अन्य जरूरी कानूनी प्रक्रियाएं किस तरह पूरी की गईं। इसके अलावा मृतकों के परिवारों को मुआवजा दिए जाने से संबंधित जानकारी भी राज्य सरकार से मांगी गई है। अदालत का जोर इस बात पर है कि संदिग्ध मौतों की परिस्थितियों की उचित जांच हो और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाए।
सुप्रीम कोर्ट पहले भी मणिपुर की हिंसा के बाद राहत और पुनर्वास को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगता रहा है। मई 2023 में अदालत ने राहत शिविरों में विस्थापित लोगों को भोजन, चिकित्सा सहायता और सुरक्षित आवाजाही जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया था। वहीं, 2026 में भी जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्टों और उसके कामकाज से संबंधित कार्यवाही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष जारी रही है। फरवरी 2026 के एक सुप्रीम कोर्ट कार्यालय रिकॉर्ड के अनुसार समिति ने अब तक 42 रिपोर्ट दाखिल की थीं।
अदालत ने राज्य सरकार से राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और संदिग्ध मौतों से जुड़े मामलों में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। अब राज्य के मुख्य सचिव की ओर से दाखिल की जाने वाली रिपोर्ट में जांच की स्थिति, FIR, पोस्टमार्टम, मुआवजा और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है। सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में चल रही इस कार्यवाही से राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों से जुड़े इन मामलों की स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों पर आगे की तस्वीर स्पष्ट होगी।