कच्चा मकान ढहा तो गौशाला के टीन शेड में रहने को मजबूर बुजुर्ग आदिवासी महिला, PM आवास का इंतजार

उमरिया जिले के नौरोजाबाद के वार्ड क्रमांक 4 में रहने वाली बुजुर्ग आदिवासी महिला सेम बाई का कच्चा मकान ढहने के बाद वह करीब तीन महीने से गौशाला के लिए बनाए गए खुले टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। महिला का दावा है कि प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए आवेदन करने और कई बार नगर परिषद कार्यालय के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें अब तक आवास का लाभ नहीं मिला है। उमरिया कलेक्टर राखी सहाय ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

Sep 17, 2026 - 13:33
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कच्चा मकान ढहा तो गौशाला के टीन शेड में रहने को मजबूर बुजुर्ग आदिवासी महिला, PM आवास का इंतजार

UNITED NEWS OF ASIA. मध्यप्रदेश के उमरिया जिले के नौरोजाबाद नगर के वार्ड क्रमांक 4 में रहने वाली बुजुर्ग आदिवासी महिला सेम बाई इन दिनों बेहद मुश्किल परिस्थितियों में जीवन गुजार रही हैं। महिला का कच्चा मकान ढह जाने के बाद पिछले करीब तीन महीनों से वह गौशाला के लिए बनाए गए खुले टीन शेड में रहने को मजबूर हैं। बारिश के मौसम में खुले शेड में रहने के कारण उनकी परेशानियां और बढ़ गई हैं। सेम बाई का कहना है कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान के लिए आवेदन किया था, लेकिन लंबे समय के इंतजार के बावजूद उन्हें अब तक आवास का लाभ नहीं मिल पाया है।

सेम बाई के मुताबिक, वह बुजुर्ग हैं और उन्हें चलने-फिरने में भी काफी परेशानी होती है। इसके बावजूद वह प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए पिछले दो से तीन वर्षों से नगर परिषद कार्यालय के चक्कर लगा रही हैं। उनका कहना है कि हर बार उन्हें आश्वासन दिया गया, लेकिन अभी तक आवास स्वीकृत होने की जानकारी नहीं मिली। मकान गिरने के बाद उनकी स्थिति और कठिन हो गई है और फिलहाल उनके पास रहने के लिए कोई दूसरा सुरक्षित स्थान नहीं है।

महिला ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि खुले टीन शेड में रहने में काफी दिक्कत होती है। बारिश के दौरान भी उन्हें इसी शेड के नीचे रहना पड़ता है। उनका कहना है कि उनका कोई सहारा नहीं है और वह चाहती हैं कि उन्हें भी प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिले, ताकि रहने के लिए सुरक्षित मकान उपलब्ध हो सके। लंबे समय से कार्यालयों के चक्कर लगाने के बाद अब उन्होंने आवास मिलने की उम्मीद भी छोड़ने की बात कही है।

मामले को लेकर जब उमरिया कलेक्टर राखी सहाय से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि संबंधित हितग्राही से आवेदन करवाया जाए और इसके बाद मामले की जांच कराई जाएगी। जब कलेक्टर को बताया गया कि बुजुर्ग महिला को चलने में काफी परेशानी होती है, तो उन्होंने कहा कि किसी अन्य व्यक्ति के माध्यम से भी आवेदन करवाया जा सकता है। प्रशासन की ओर से जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि महिला प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र हैं या नहीं और उन्हें योजना का लाभ किस प्रक्रिया के तहत दिया जा सकता है।

यह मामला बारिश के बीच आवास की समस्या से जूझ रहे एक बुजुर्ग हितग्राही की स्थिति को सामने लाता है। सेम बाई का कहना है कि वह लंबे समय से आवास के लिए प्रयास कर रही हैं और अब कच्चा मकान गिरने के बाद खुले टीन शेड में रहने की मजबूरी है। ऐसे में उनकी नजर प्रशासन की जांच और आगे होने वाली कार्रवाई पर है।

फिलहाल प्रशासन की ओर से आवेदन के बाद जांच कराने की बात कही गई है। जांच में महिला की पात्रता और योजना से जुड़े दस्तावेजों की स्थिति सामने आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। सेम बाई की मांग है कि उनकी परिस्थितियों को देखते हुए मामले पर जल्द ध्यान दिया जाए और उन्हें रहने के लिए सुरक्षित आवास उपलब्ध कराने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएं।