US के 100% टैरिफ वाले कानून पर भारत का जवाब, कहा- 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

अमेरिकी संसद द्वारा रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का रास्ता खोलने वाले कानून को मंजूरी दिए जाने के बाद भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है और बदलती बाजार परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग स्रोतों से ऊर्जा की खरीद जारी रखेगा। भारत ने कानून के संभावित असर पर अमेरिका के साथ बातचीत किए जाने की भी जानकारी दी है।

Sep 17, 2026 - 12:22
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US के 100% टैरिफ वाले कानून पर भारत का जवाब, कहा- 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता

UNITED NEWS OF ASIA. अमेरिकी संसद में रूस और ईरान पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून को मंजूरी मिलने के बाद भारत ने इस घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस कानून के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले कुछ देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा से मंजूरी के बाद यह विधेयक अब राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा गया है। हालांकि, फिलहाल भारत पर इस 100 प्रतिशत टैरिफ को लागू नहीं किया गया है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत ने अमेरिकी कांग्रेस में रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने संबंधी Sanctioning Russia and Iran Act के पारित होने का संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने बताया कि सरकार इस घटनाक्रम और इससे जुड़े आगे के फैसलों पर नजर रख रही है। भारत की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि वह अपने व्यापार और आर्थिक हितों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाएगा और संभावित प्रभावों से निपटने के लिए व्यापार तथा उद्योग से जुड़े पक्षों के साथ काम करेगा।

भारत के लिए इस पूरे मामले में ऊर्जा सुरक्षा एक प्रमुख मुद्दा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, भारत अपने 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है। देश बाजार की परिस्थितियों और उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग देशों और स्रोतों से ऊर्जा की खरीद करता है। सरकार का कहना है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों के बीच ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना उसकी प्राथमिकताओं में शामिल है।

अमेरिकी कानून का असर भारत के साथ-साथ उन अन्य देशों पर भी पड़ सकता है जो रूसी ऊर्जा खरीदते हैं। भारत और चीन रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों में शामिल हैं। नए कानून में अमेरिकी राष्ट्रपति को ऐसे देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की शक्ति देने का प्रावधान है। हालांकि, किसी देश पर वास्तव में कितना टैरिफ लगाया जाएगा और इसे कब लागू किया जाएगा, यह आगे के अमेरिकी प्रशासनिक फैसलों पर निर्भर करेगा।

भारत ने इस मामले के संभावित प्रभावों को लेकर अमेरिका के साथ उच्च स्तर पर बातचीत भी की है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि भारतीय पक्ष ने विभिन्न अमेरिकी अधिकारियों के साथ इस कानून के द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ने वाले संभावित असर को उठाया है। भारत का कहना है कि इस मुद्दे का प्रभाव केवल दोनों देशों के व्यापार तक सीमित नहीं रह सकता, बल्कि अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

फिलहाल भारत सरकार की ओर से पूरे घटनाक्रम पर नजर रखी जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा कानून पर हस्ताक्षर किए जाने और उसके बाद संभावित प्रशासनिक फैसलों से आगे की स्थिति स्पष्ट होगी। भारत ने संकेत दिया है कि ऊर्जा सुरक्षा और अपने व्यापारिक-आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए वह परिस्थितियों के अनुसार आवश्यक कदम उठाएगा।