ग्राम पंचायत कोतरलिया में सेड निर्माण पर उठे सवाल, ग्रामीणों ने पंचायत राशि के उपयोग की जांच की मांग की
रायगढ़ जिले की ग्राम पंचायत कोतरलिया के आश्रित ग्राम चिटकाकानी में नए सेड निर्माण को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष भी यहां सेड का निर्माण कराया गया था, इसके बावजूद इस वर्ष दूसरी जगह नया सेड बनाया गया है। ग्रामीणों ने निर्माण की आवश्यकता, स्थल चयन, स्वीकृत राशि, गुणवत्ता और उपयोगिता की जांच कराने की मांग की है।
UNITED NEWS OF ASIA. महेंद्र अग्रवाल, रायगढ़ l रायगढ़ जिले की ग्राम पंचायत कोतरलिया के आश्रित ग्राम चिटकाकानी में सेड निर्माण को लेकर ग्रामीणों के बीच सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत को सेड निर्माण के लिए राशि प्राप्त होने के बाद संबंधित स्थान पर निर्माण कराया गया है, लेकिन निर्माण स्थल और उसकी वास्तविक उपयोगिता को लेकर कई सवाल सामने आ रहे हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है, ताकि निर्माण कार्य से जुड़ी वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
ग्रामीणों के अनुसार चिटकाकानी में पिछले वर्ष भी एक सेड का निर्माण कराया गया था। इसके बावजूद इस वर्ष एक अन्य स्थान पर फिर से सेड का निर्माण कराया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नए सेड के लिए चुने गए स्थान पर सार्वजनिक उपयोग की पर्याप्त संभावना नजर नहीं आती। उनका कहना है कि यह स्थान न तो किसी प्रमुख चौराहे पर है और न ही ऐसे स्थान पर स्थित है, जहां बड़ी संख्या में ग्रामीणों का नियमित आवागमन होता हो। ऐसे में निर्माण के उद्देश्य और उपयोगिता को लेकर ग्रामीणों के बीच चर्चा बनी हुई है।
ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि सेड निर्माण के लिए स्थल का चयन किन आधारों पर किया गया। क्या निर्माण से पहले ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों का आकलन किया गया था और क्या प्रस्तावित स्थल को सार्वजनिक उपयोग की दृष्टि से उपयुक्त पाया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण का उद्देश्य आम लोगों को सुविधा उपलब्ध कराना है, तो निर्माण स्थल और उसकी उपयोगिता भी स्पष्ट होनी चाहिए।
मामले को लेकर ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि निर्माण कार्य शुरू होने से पहले संबंधित जनपद पंचायत और पंचायत स्तर के अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया था या नहीं। यदि निरीक्षण किया गया था तो क्या अधिकारियों ने स्थल की आवश्यकता, उपयोगिता और उपयुक्तता का परीक्षण किया था। ग्रामीणों के इन सवालों का जवाब विभागीय जांच और मौके के निरीक्षण के बाद ही सामने आ सकता है।
ग्रामीणों के बीच यह आशंका भी व्यक्त की जा रही है कि कहीं निर्माण कार्य केवल स्वीकृत राशि के उपयोग तक सीमित तो नहीं रह गया। हालांकि इस संबंध में लगाए जा रहे सवालों और आशंकाओं की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए निर्माण की स्वीकृति, राशि, स्थल चयन, निर्माण एजेंसी और कार्य की गुणवत्ता की जांच आवश्यक मानी जा रही है।
ग्रामीणों ने जनपद पंचायत के वरिष्ठ अधिकारियों से मौके पर पहुंचकर निरीक्षण करने की मांग की है। साथ ही पिछले वर्ष बनाए गए सेड और इस वर्ष निर्मित सेड की आवश्यकता एवं उपयोगिता का तुलनात्मक परीक्षण कराने की मांग भी की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण सार्वजनिक हित और नियमानुसार किया गया है तो जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। वहीं, यदि किसी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हुआ है तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब ग्रामीणों की नजर संबंधित जनपद पंचायत के अधिकारियों की कार्रवाई पर है। मौके के निरीक्षण और दस्तावेजों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि चिटकाकानी में बनाए गए नए सेड की वास्तविक आवश्यकता क्या थी और इसका सार्वजनिक उपयोग कितना है। फिलहाल ग्रामीणों ने पंचायत राशि के सदुपयोग को लेकर पारदर्शी जांच की मांग की है।