कचवा गांव में रहने वाले नगेसिया आदिवासी समाज के बुजुर्गों के अनुसार, 60 वर्ष की उम्र पार करने के बाद वृद्धावस्था पेंशन उनके लिए आर्थिक सहारे का महत्वपूर्ण माध्यम है। उनका कहना है कि पिछले करीब तीन वर्षों से उनके खाते में पेंशन की राशि नहीं पहुंची है। लंबे समय से पेंशन नहीं मिलने के कारण परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी इसका असर पड़ रहा है। बुजुर्गों का कहना है कि दवाइयों और जरूरी सामान की खरीदारी के लिए भी उन्हें आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पीड़ित बुजुर्गों ने बताया कि उन्होंने अपनी समस्या को लेकर पंचायत सचिव सहित संबंधित अधिकारियों से कई बार संपर्क किया। समस्या के समाधान की उम्मीद में वे लगातार अधिकारियों के चक्कर लगाते रहे, लेकिन अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। ग्रामीणों का कहना है कि शिकायत करने के बावजूद पेंशन की राशि उनके खातों में नहीं पहुंची, जिससे उनकी परेशानी लगातार बनी हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक, वृद्धावस्था पेंशन जैसी योजना का उद्देश्य उम्रदराज लोगों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, ताकि उन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े। लेकिन कचवा गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्हें लंबे समय से इस योजना का लाभ नहीं मिल रहा है। ऐसे में सरकारी योजना का लाभ पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाने की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को लेकर ग्रामीणों में प्रशासन से जल्द कार्रवाई की उम्मीद है। बुजुर्गों का कहना है कि तीन वर्षों से लंबित पेंशन की समस्या की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ दिलाया जाए। साथ ही पंचायत स्तर पर हुई कथित लापरवाही की भी जांच की मांग की जा रही है।
कचवा गांव का यह मामला सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक समय पर पहुंचाने की जरूरत को सामने लाता है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की कार्रवाई पर है। बुजुर्गों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग उनकी शिकायत का संज्ञान लेकर पेंशन से जुड़ी समस्या का निराकरण करेगा और यदि वे पात्र पाए जाते हैं तो उन्हें लंबित लाभ दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।