मनेन्द्रगढ़ में सट्टे का 'सल्तनत': वार्ड 1 से 22 तक बिछा है जाल, "कंगाल" से "करोड़पति" बनने का काला खेल जारी।
मनेन्द्रगढ़ शहर में सट्टेबाजी का अवैध कारोबार तेजी से फैलता नजर आ रहा है। वार्ड नंबर 1 से 22 तक सटोरियों का नेटवर्क सक्रिय बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार ऑनलाइन और बैंक खातों के जरिए बड़े पैमाने पर लेन-देन हो रहा है, जिससे युवाओं पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
UNITED NEWS OF ASIA. प्रदीप पाटकर, मनेन्द्रगढ़। शहर की शांति और व्यवस्था पर सट्टेबाजी के काले कारोबार ने अपना शिकंजा कस लिया है। आलम यह है कि शहर के वार्ड नंबर 1 से लेकर वार्ड नंबर 22 तक ऐसा कोई कोना नहीं बचा है, जहाँ सट्टे की पर्चियाँ न कट रही हों या ऑनलाइन दांव न लग रहे हों। रसूख और रुपयों के दम पर सटोरिये अब खुलेआम शहर के प्रमुख चौराहों पर अपनी 'दुकान' सजाए बैठे हैं।
इन इलाकों में सटोरियों का खुलेआम कब्जा
शहर के हृदय स्थल और व्यस्ततम क्षेत्रों में सट्टा गिरोह बेखौफ सक्रिय है:
हनुमान टेकरी के सामने और बस स्टैंड क्षेत्र
खेड़िया तिराहा और अरब बाबा इलाका
नाला पार और विवेकानंद कॉलेज के आसपास सब्जी मंडी और स्टेशन रोड स्थित हनुमान मंदिर क्षेत्र इन क्षेत्रों में सट्टा काटने वाले गिरोह के सदस्य खुद को किसी बड़े 'खाईवाल' से कम नहीं समझते। हैरानी की बात यह है कि ये वह लोग हैं जिनके पास कुछ समय पहले तक रहने को सही छत नहीं थी, लेकिन आज वे करोड़ों की संपत्ति के मालिक बन बैठे हैं।
बिना काम किए कैसे हो रही 'उन्नति'?
जनता के बीच यह सवाल तेजी से कौंध रहा है कि आखिर बिना किसी ठोस व्यापार या नौकरी के, दिन-रात एक ही जगह बैठकर ये लोग इतनी जल्दी मालामाल कैसे हो रहे हैं?
जांच का विषय: क्या इन सटोरियों की संपत्ति की कभी बारीकी से जांच हुई है? वह कौन सा अलादीन का चिराग है जो रातों-रात इन्हें फर्श से अर्श पर पहुँचा रहा है?
बैंक खातों के जरिए 'मनी लॉन्ड्रिंग' का खेल
सूत्रों के अनुसार, इन सटोरियों ने कई ऐसे 'डमी' खाताधारक तैयार किए हैं जिनके बैंक खातों में रोजाना लाखों रुपये का लेन-देन हो रहा है।
मार्केट की हेराफेरी: चंद रुपयों के लालच में आम लोगों के खातों का इस्तेमाल करोड़ों के हेर-फेर के लिए किया जा रहा है।
ऑनलाइन कालाबाजारी: कैश के साथ-साथ ऑनलाइन पेमेंट एप्स के जरिए सट्टे का साम्राज्य फैलाया जा रहा है।
आय की विसंगति: यदि बैंक खातों और इन संदिग्धों की आय की निष्पक्ष जांच की जाए, तो करोड़ों के बेनामी ट्रांजेक्शन का खुलासा हो सकता है।
प्रशासन से उठते सवाल
क्या स्थानीय प्रशासन और पुलिस इन सटोरियों की बढ़ती हिम्मत से अनजान है? शहर की सड़कों पर खुलेआम चलता यह कारोबार मनेन्द्रगढ़ के युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है।
वक्त आ गया है कि:
सटोरियों और उनके एजेंटों के बैंक ट्रांजेक्शन की जांच हो।
संदिग्ध रूप से बढ़ी संपत्ति और आय के स्रोतों का ऑडिट किया जाए।
प्रमुख अड्डों पर पुलिसिया दबिश के साथ सख्त कानूनी कार्रवाई हो।