NCERT की नई कक्षा 9 सोशल साइंस किताब में बड़ा बदलाव, संविधान की प्रस्तावना नहीं शामिल

एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सोशल साइंस पुस्तक में संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किया गया है। इसके साथ ही 1975-77 की राष्ट्रीय आपातकाल पर नया अध्याय जोड़ा गया है, जिसमें उस दौर को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक में चुनाव आयोग की भूमिका और जयप्रकाश नारायण आंदोलन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है।

Jun 26, 2026 - 15:27
Jun 26, 2026 - 15:31
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NCERT की नई कक्षा 9 सोशल साइंस किताब में बड़ा बदलाव, संविधान की प्रस्तावना नहीं शामिल

UNITED NEWS OF ASIA. नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 9 की नई सोशल साइंस पुस्तक "अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड – पार्ट 1" जारी की है। इस पुस्तक में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक चर्चा संविधान की प्रस्तावना (Preamble) को शामिल नहीं किए जाने को लेकर हो रही है। नई पुस्तक में प्रस्तावना के साथ-साथ उसमें शामिल "संप्रभु", "समाजवादी", "पंथनिरपेक्ष", "लोकतांत्रिक" और "गणराज्य" जैसे शब्दों की व्याख्या भी नहीं दी गई है।

हालांकि पुस्तक में भारतीय संविधान की निर्माण प्रक्रिया, लोकतांत्रिक संस्थाओं की भूमिका और मौलिक अधिकारों से जुड़े विषयों को शामिल किया गया है। एनसीईआरटी ने पाठ्यक्रम को नए दृष्टिकोण से तैयार करते हुए कुछ विषयों को विस्तार दिया है और कुछ विषयों की प्रस्तुति में बदलाव किया है।

नई पुस्तक में वर्ष 1975 से 1977 के दौरान लागू राष्ट्रीय आपातकाल (इमरजेंसी) पर एक अलग अध्याय जोड़ा गया है। इसमें आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है। पुस्तक के अनुसार उस अवधि में अधिकांश मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए थे, प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई थी तथा अनेक विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि इन घटनाओं का लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिक स्वतंत्रताओं पर व्यापक प्रभाव पड़ा।

पुस्तक में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले जन आंदोलन का भी विस्तार से उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उन्होंने छात्रों और आम नागरिकों को संगठित कर बिहार और गुजरात सहित कई राज्यों में बड़े जन आंदोलन खड़े किए। साथ ही यह भी बताया गया है कि 1977 में आपातकाल समाप्त होने के बाद हुए आम चुनाव में मतदाताओं ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से तत्कालीन सरकार को सत्ता से बाहर कर भारतीय लोकतंत्र की मजबूती का परिचय दिया।

नई पुस्तक में 1970 के दशक की राजनीतिक और आर्थिक परिस्थितियों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें बताया गया है कि उस समय बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और कुप्रबंधन के आरोपों के कारण तत्कालीन सरकार के खिलाफ जन असंतोष बढ़ा, जिसके बाद जून 1975 में आंतरिक अशांति का हवाला देते हुए राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया गया।

एनसीईआरटी की इस पुस्तक में भारत निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया है। पुस्तक में कहा गया है कि 2024 के आम चुनाव में 96.8 करोड़ से अधिक मतदाताओं के साथ दुनिया के सबसे बड़े लोकतांत्रिक चुनाव का सफल संचालन एक बड़ी उपलब्धि है। इसमें चुनाव आयोग द्वारा जनप्रतिनिधित्व अधिनियम (आरपीए), आदर्श आचार संहिता, इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम), वीवीपैट तथा मतदाता जागरूकता अभियानों के माध्यम से निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने के प्रयासों का उल्लेख किया गया है। साथ ही विद्यार्थियों को 1977 से 2024 तक हुए लोकसभा चुनावों में विजयी दलों और गठबंधनों का अध्ययन करने का अभ्यास भी दिया गया है।

नई पुस्तक में किए गए इन बदलावों को लेकर शिक्षा जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। विशेष रूप से संविधान की प्रस्तावना को शामिल नहीं किए जाने और आपातकाल पर विस्तृत अध्याय जोड़े जाने को लेकर विभिन्न पक्ष अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।