‘बोल मैं शेर हूं’; E-20 पेट्रोल को लेकर अरविंद केजरीवाल का पीएम मोदी पर तंज, चुटकुले के जरिए साधा निशाना

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E-20 पेट्रोल नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर फिर निशाना साधा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वीडियो साझा करते हुए केजरीवाल ने एक चुटकुले के जरिए सरकार की नीति पर व्यंग्य किया। उन्होंने आरोप लगाया कि E-20 पेट्रोल के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। केजरीवाल ने यह भी दावा किया कि E-20 नीति अमेरिकी दबाव में लागू की गई है और इससे वाहन मालिकों पर तकनीकी व आर्थिक बोझ बढ़ सकता है। हालांकि, अमेरिका के दबाव और एथेनॉल आयात से जुड़े उनके दावों के समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया गया है।

Aug 10, 2026 - 13:11
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‘बोल मैं शेर हूं’; E-20 पेट्रोल को लेकर अरविंद केजरीवाल का पीएम मोदी पर तंज, चुटकुले के जरिए साधा निशाना

UNITED NEWS OF ASIA. दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने E-20 पेट्रोल नीति को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर एक बार फिर निशाना साधा है। केजरीवाल पिछले कुछ समय से E-20 पेट्रोल के मुद्दे पर सरकार से सवाल कर रहे हैं। सोमवार को उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए व्यंग्यात्मक अंदाज में सरकार की नीति पर सवाल उठाए।

वीडियो में केजरीवाल ने एक चुटकुले का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि एक काल्पनिक प्रतियोगिता में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुलिस टीमों को जंगल में छोड़े गए शेर को खोजने का काम दिया जाता है। चुटकुले के अनुसार, ट्रंप की पुलिस 24 घंटे में और पुतिन की पुलिस एक घंटे में शेर को ढूंढ लेती है। वहीं, मोदी की पुलिस कई दिनों तक वापस नहीं लौटती। बाद में जब लोग जंगल में पहुंचते हैं तो कथित तौर पर पुलिस एक कुत्ते को पकड़कर उसे शेर कहलवाने की कोशिश कर रही होती है।

केजरीवाल ने इस चुटकुले के माध्यम से E-20 पेट्रोल नीति पर सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश में E-20 के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाया जा रहा है। उनका कहना है कि सरकार को आलोचना का जवाब तथ्यों और चर्चा के माध्यम से देना चाहिए, न कि आलोचनात्मक आवाजों को रोककर।

केजरीवाल ने दावा किया कि E-20 नीति को लेकर जनता के मन में कई सवाल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने पर्याप्त बुनियादी ढांचे और पुराने वाहनों की अनुकूलता सुनिश्चित किए बिना E-20 को लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उनके अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे वाहन हैं जिन्हें मूल रूप से अधिक एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन के लिए डिजाइन नहीं किया गया था। इससे वाहन मालिकों को भविष्य में तकनीकी और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

AAP प्रमुख ने यह भी दावा किया कि E-20 नीति अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दबाव में लागू की गई है। उनका आरोप है कि अमेरिका भारत जैसे बड़े बाजार में अपने एथेनॉल के लिए मांग बढ़ाना चाहता है। केजरीवाल ने कहा कि अमेरिका दुनिया के प्रमुख एथेनॉल उत्पादक देशों में शामिल है और वहां उत्पादन की खपत को लेकर दबाव रहता है।

केजरीवाल ने दावा किया कि भारत ने पिछले वर्ष अमेरिका से करीब एक अरब लीटर एथेनॉल आयात किया था और इस वर्ष यह आंकड़ा पांच अरब लीटर तक पहुंच सकता है। उन्होंने आरोप लगाया कि E-20 नीति का उद्देश्य अमेरिकी एथेनॉल के लिए भारत में बड़ा बाजार तैयार करना है।

हालांकि, अमेरिका के दबाव में E-20 नीति लागू किए जाने और एथेनॉल आयात से जुड़े इन आरोपों के समर्थन में केजरीवाल की ओर से कोई आधिकारिक दस्तावेज या स्वतंत्र प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में इन दावों को उनके राजनीतिक आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए।

केजरीवाल ने यह भी सवाल उठाया कि जब अमेरिका में कम एथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन का इस्तेमाल अब भी बड़े स्तर पर होता है, तो भारत में E-20 को व्यापक रूप से लागू करने की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने सरकार से नीति के प्रभाव, वाहनों की अनुकूलता और उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले संभावित आर्थिक बोझ को लेकर स्पष्ट जानकारी देने की मांग की।