न्यूटन चिकली आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भोजन व्यवस्था को लेकर किया प्रदर्शन, जांच की मांग

परासिया के न्यूटन चिकली स्थित जूनियर आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भोजन की गुणवत्ता और छात्रावास की व्यवस्थाओं को लेकर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने अधीक्षिका पर गंभीर आरोप लगाते हुए भोजन व्यवस्था में अनियमितता की शिकायत की और मामले की जांच की मांग की। घटना के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।

Aug 10, 2026 - 18:17
 0  22
न्यूटन चिकली आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं ने भोजन व्यवस्था को लेकर किया प्रदर्शन, जांच की मांग

UNITED NEWS OF ASIA. यज्ञ राज पटेल, छिंदवाड़ा l न्यूटन चिकली स्थित जूनियर आदिवासी कन्या छात्रावास की छात्राओं ने छात्रावास में भोजन की गुणवत्ता और व्यवस्थाओं को लेकर प्रदर्शन किया। छात्राओं ने छात्रावास की अधीक्षिका माया के खिलाफ नारेबाजी करते हुए अपनी समस्याएं सामने रखीं। प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित मीनू के अनुसार गुणवत्तापूर्ण और पौष्टिक भोजन नहीं मिल रहा है।

छात्राओं के अनुसार छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता को लेकर लंबे समय से परेशानी बनी हुई है। उनका आरोप है कि निर्धारित खाद्य सामग्री के स्थान पर कम गुणवत्ता वाले भोजन का उपयोग किया जा रहा है। छात्राओं ने यह भी दावा किया कि शिकायत करने पर उनकी समस्याओं का उचित समाधान नहीं किया गया, जिसके बाद उन्हें प्रदर्शन के लिए बाहर आना पड़ा।

प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने अधीक्षिका के खिलाफ नारे लगाए और भोजन व्यवस्था में सुधार की मांग की। छात्राओं का कहना है कि छात्रावास में रहने वाले बच्चों के लिए भोजन केवल सुविधा नहीं, बल्कि उनकी पढ़ाई और स्वास्थ्य से जुड़ा जरूरी विषय है। उनका कहना है कि पर्याप्त और पौष्टिक भोजन उपलब्ध नहीं होने से उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मामले को लेकर शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। छात्राओं के प्रदर्शन और उनकी शिकायतों के बाद अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठ रही है। यह पता लगाया जाना जरूरी है कि छात्रावास में निर्धारित मीनू और खाद्य सामग्री के अनुसार भोजन उपलब्ध कराया जा रहा था या नहीं तथा यदि किसी स्तर पर अनियमितता हुई है तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है।

छात्रावास में रहने वाली बालिकाओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में भोजन की गुणवत्ता से संबंधित शिकायतों को गंभीरता से लेकर अधिकारियों द्वारा मौके पर निरीक्षण और छात्राओं से सीधे बातचीत किए जाने की आवश्यकता है। साथ ही खाद्य सामग्री की उपलब्धता, स्टॉक रजिस्टर, मीनू और भोजन की गुणवत्ता की जांच भी की जा सकती है।

छात्राओं ने मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही छात्रावास में नियमित रूप से गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराने और भोजन व्यवस्था की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

मामला सामने आने के बाद छात्रावास में पढ़ने वाली आदिवासी बालिकाओं की मूलभूत सुविधाओं और सरकारी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है। छात्राओं का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि उन्हें मिलने वाली सुविधाओं में सुधार और बेहतर भोजन सुनिश्चित कराना है।

अब सभी की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है। यदि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो छात्राओं की समस्याओं की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। साथ ही दोष पाए जाने पर जिम्मेदारी तय होने से छात्रावास की व्यवस्था में सुधार की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया जा सकेगा।