प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में पर्यावरण और विकास के बीच संतुलन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को मां का दर्जा दिया गया है। इसी सोच के आधार पर भारत में यह मान्यता रही है कि विकास और पर्यावरण एक-दूसरे के विकल्प नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने सतत विकास की दिशा में ऐसी नीतियों और पहलों की आवश्यकता बताई, जिनमें आर्थिक प्रगति के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी महत्व दिया जाए।
ब्रिक्स की बढ़ती भूमिका का उल्लेख करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि संगठन की बढ़ती ताकत, आकर्षण और उस पर बढ़ता विश्वास अलग-अलग महाद्वीपों, संस्कृतियों और विकास यात्राओं को एक मंच पर ला रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया एक-दूसरे से पहले की तुलना में कहीं अधिक जुड़ी हुई है। ऐसे में किसी एक क्षेत्र में उत्पन्न संकट का प्रभाव दूसरे क्षेत्रों तक भी पहुंच सकता है। इसलिए ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और लचीलापन बढ़ाना आवश्यक है।
प्रधानमंत्री ने छोटे और मध्यम उद्यमों को मजबूत करने की दिशा में ब्रिक्स MSME कोऑपरेशन पोर्टल की पहल का भी उल्लेख किया। इस पहल के माध्यम से छोटे उद्यमों को ज्ञान, वित्त और नए बाजारों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। इससे विभिन्न ब्रिक्स देशों के छोटे कारोबारों के बीच संपर्क और सहयोग बढ़ाने के साथ नए अवसरों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
कृषि क्षेत्र में तकनीक के इस्तेमाल पर भी प्रधानमंत्री ने अपनी बात रखी। उन्होंने डिजिटल कृषि पर आधारित ब्रिक्स नेटवर्क की आवश्यकता पर जोर दिया। पीएम के अनुसार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और जियोस्पेशियल तकनीक को किसानों की वास्तविक जरूरतों के साथ जोड़ने से कृषि क्षेत्र में नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। तकनीक के माध्यम से किसानों तक बेहतर जानकारी और उपयोगी समाधान पहुंचाने की दिशा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया गया।
इस वर्ष के ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मुख्य ओपन सेशन की थीम “Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability: Shaping the Future for Inclusive Global Growth” रखी गई थी। सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत ब्रिक्स देशों के प्रमुख नेता और आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। भारत की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में वैश्विक आर्थिक सहयोग, तकनीक, सतत विकास और साझा चुनौतियों से निपटने के मुद्दों पर चर्चा हुई।
समापन सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक सहयोग की जरूरत को रेखांकित करते हुए कहा कि मौजूदा दौर की चुनौतियों का सामना मिलकर करने की आवश्यकता है। पर्यावरण संरक्षण, नवाचार, कृषि, MSME और डिजिटल तकनीक जैसे क्षेत्रों में ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। भारत की ओर से प्रस्तुत पहलों का उद्देश्य समावेशी और टिकाऊ वैश्विक विकास के लिए सहयोग का दायरा बढ़ाना बताया गया।