मुख्यमंत्री विजय ने विधानसभा में कहा कि मौजूदा मीनमबक्कम एयरपोर्ट फिलहाल यात्रियों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखता है। ऐसे में चेन्नई के लिए नए एयरपोर्ट की तत्काल आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भविष्य में यदि नए हवाई अड्डे की जरूरत महसूस होती है तो ऐसी जगह का चयन किया जाना चाहिए, जहां कृषि भूमि और रिहायशी क्षेत्रों पर कम से कम असर पड़े।
परंदूर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट परियोजना को लेकर पर्यावरण और कृषि भूमि से जुड़े मुद्दे लगातार उठते रहे हैं। स्थानीय स्तर पर लोगों ने बहुफसली और उपजाऊ जमीन के प्रभावित होने की आशंका जताते हुए परियोजना का विरोध किया था। विधानसभा चुनाव से पहले भी विजय ने इस मुद्दे को लेकर स्थानीय लोगों और किसानों के समर्थन में अभियान चलाया था।
अब सरकार की ओर से परियोजना को वापस लेने की घोषणा के बाद DMK ने मुख्यमंत्री के फैसले पर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी पार्टी ने मांग की है कि पिछली सरकार के कार्यकाल में शुरू की गई परंदूर एयरपोर्ट परियोजना से संबंधित फाइलों को सार्वजनिक किया जाए। DMK ने मुख्यमंत्री विजय को इस मामले में एक सप्ताह का अल्टीमेटम भी दिया है।
DMK का कहना है कि मुख्यमंत्री को परियोजना से जुड़ी सभी फाइलें सीधे सार्वजनिक करनी चाहिए। विपक्ष ने चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित अवधि में दस्तावेज सामने नहीं लाए गए तो विधानसभा में विशेषाधिकार प्रस्ताव लाने पर विचार किया जाएगा। DMK ने आरोप लगाया है कि ऐसा कदम यह स्पष्ट करने के लिए जरूरी होगा कि विधानसभा में परियोजना को लेकर दी गई जानकारी सही थी या नहीं।
परंदूर एयरपोर्ट परियोजना रद्द किए जाने के फैसले ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नया मुद्दा पैदा कर दिया है। एक ओर सरकार इसे स्थानीय लोगों, किसानों और पर्यावरणीय चिंताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया फैसला बता रही है, वहीं विपक्ष परियोजना से जुड़े पुराने रिकॉर्ड और फैसलों को सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच चेन्नई के भविष्य के हवाई यातायात और औद्योगिक विकास को लेकर भी बहस तेज हो गई है। सरकार का तर्क है कि किसी भी नए एयरपोर्ट के लिए ऐसी जगह का चयन जरूरी है, जहां विकास के साथ आम लोगों, कृषि भूमि और पर्यावरण पर कम से कम प्रभाव पड़े। आने वाले दिनों में DMK की ओर से उठाए जाने वाले कदमों के बाद यह मुद्दा तमिलनाडु विधानसभा में और गरमा सकता है।