धर्मेंद्र प्रधान ने अपने संदेश में कहा कि 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए सरकार ने दोबारा परीक्षा सफलतापूर्वक आयोजित कराई। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने उन्हें गहराई से आहत किया और वे नहीं चाहते कि छात्रों का भविष्य राजनीतिक विवादों या कानूनी लड़ाइयों में उलझे। इसी कारण उन्होंने पद छोड़ने का निर्णय लिया।
शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन से जुड़े संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पहली प्रतिक्रिया दी। संगठन के प्रमुख अभिजीत दिपके ने इसे छात्र आंदोलन और लोकतंत्र की जीत बताया। उन्होंने कहा कि कई लोग यह मानते थे कि सरकार किसी भी परिस्थिति में नहीं झुकेगी, लेकिन छात्रों के शांतिपूर्ण और लगातार संघर्ष ने सरकार को फैसला लेने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे बड़ी होती है और यह फैसला उसी का परिणाम है।
अभिजीत दिपके ने सरकार के सामने दो नई मांगें भी रखीं। उन्होंने मांग की कि कथित तौर पर पेपर लीक प्रकरण से जुड़े तनाव के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करने वाले पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग भी दोहराई।
CJP ने दावा किया कि सरकार पहले ही कुछ मांगों पर सहमति जता चुकी है और अब शेष मांगों पर भी शीघ्र निर्णय लिया जाना चाहिए। अभिजीत दिपके ने कहा कि छात्र केवल निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और अपने भविष्य की सुरक्षा चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का समर्थन या विरोध नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों की रक्षा करना है।
इस बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) में भी बड़े प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। जानकारी के अनुसार, हाल ही में 47 अधिकारियों को हटाया गया है और एजेंसी में परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित एवं पारदर्शी बनाने के लिए कई सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि भविष्य में प्रश्नपत्र लीक जैसी घटनाओं को रोकने के लिए तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर व्यापक बदलाव किए जाएंगे।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उसके बाद आई राजनीतिक तथा छात्र संगठनों की प्रतिक्रियाओं ने देश में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और पारदर्शिता को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में सरकार इन मांगों पर क्या निर्णय लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।