कालीघाट मंदिर के गहनों की चाबी 1980 से गायब, 1,000 करोड़ के घोटाले के आरोप से मचा हड़कंप

कोलकाता के ऐतिहासिक कालीघाट मंदिर की संपत्तियों और खजाने की सुरक्षा को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। मंदिर की तिजोरी की चाबी 1980 से गायब होने का दावा किया गया है। सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने मंदिर की संपत्तियों में कथित अनियमितताओं और 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित घोटाले का आरोप लगाते हुए दक्षिण 24 परगना के जिला जज से जांच और एफआईआर की मांग की है।

Sep 8, 2026 - 12:02
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कालीघाट मंदिर के गहनों की चाबी 1980 से गायब, 1,000 करोड़ के घोटाले के आरोप से मचा हड़कंप

UNITED NEWS OF ASIA. कोलकाता के प्रसिद्ध कालीघाट मंदिर को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। मंदिर के गहनों और संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाते हुए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के संभावित घोटाले और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। मामले में कोलकाता के पुराने जमींदार सबर्ण रॉय चौधरी परिवार ने दक्षिण 24 परगना के जिला जज से संपर्क कर जांच और एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

परिवार के सदस्य सचिव देबर्षी रॉय चौधरी के मुताबिक, मंदिर से जुड़े कई पुराने सवालों का अब तक संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। परिवार ने मंदिर प्रबंधन में कथित पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है। उनकी ओर से दाखिल अर्जी में 1980 से गायब बताई जा रही तिजोरी की चाबी का मुद्दा भी उठाया गया है। बताया गया है कि संबंधित तिजोरी एक सरकारी बैंक में रखी गई है।

मंदिर की संपत्तियों और खजाने के रखरखाव को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। परिवार का आरोप है कि मंदिर की संपत्तियों का हिसाब-किताब रखने वाली समिति का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। इसके बावजूद व्यवस्था जारी रहने से मंदिर की संपत्तियों की सुरक्षा और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवार ने आशंका जताई है कि ऐसी स्थिति से मंदिर की संपत्ति के दुरुपयोग की संभावना बढ़ सकती है और श्रद्धालुओं का प्रबंधन पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।

इस विवाद के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन से जांच करने को कहा है। हालांकि, 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले का आरोप अभी आरोप के स्तर पर है और इसकी वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

कालीघाट मंदिर में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप पहले भी सामने आ चुके हैं। वर्ष 2006 में मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट में शिकायत की गई थी। उस समय तत्कालीन चेयरमैन ने स्थिति को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया था कि मंदिर को मिलने वाला चढ़ावा जमा नहीं किया जा रहा है और पूजा के स्लॉट बाहरी लोगों को बेचे जा रहे हैं।

अब एक बार फिर मंदिर की तिजोरी की चाबी, संपत्तियों के हिसाब-किताब और प्रबंधन व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने कालीघाट मंदिर प्रशासन को विवादों के केंद्र में ला दिया है। कोर्ट में दाखिल अर्जी और प्रस्तावित जांच के बाद यह साफ होने की उम्मीद है कि मंदिर की संपत्तियों के प्रबंधन में वास्तव में कोई वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं।