विकास के दावों के बीच दर्दनाक तस्वीर: बीमार बच्चों के इलाज के लिए पैदल चलने को मजबूर मां
दक्षिण बैहर के बिठली क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की तस्वीर सामने आई है। एक मां अपने बीमार बच्चों को इलाज के लिए पैदल ले जाने को मजबूर बताई जा रही है। वहीं मलेरिया से पीड़ित एक महिला भी इलाज के लिए पैदल आने-जाने को मजबूर नजर आई। ग्रामीणों की परेशानियां विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
UNITED NEWS OF ASIA. सायमा नाज, बालाघाट l विकास के दावों के बीच दक्षिण बैहर के बिठली क्षेत्र से सामने आई एक तस्वीर इलाके की जमीनी स्थिति पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है। बिठली से स्कूलटोला जाने वाली सड़क पर बुनियादी सुविधाओं की कमी के बीच एक मां अपने बीमार बच्चों के इलाज के लिए पैदल जाने को मजबूर बताई जा रही है। परिवार पर पहले ही दुखों का पहाड़ टूट चुका है। महिला ने पिछले वर्ष अपने एक बेटे को खो दिया था और अब दूसरे बेटे की भी मौत हो चुकी है। ऐसे में अपने बीमार बच्चों को इलाज तक पहुंचाने के लिए उसे पैदल सफर करना पड़ रहा है।
बताया जा रहा है कि महिला जिस रास्ते से बच्चों को इलाज के लिए लेकर जा रही है, वहां आवागमन के लिए पक्की सड़क की सुविधा नहीं है। खराब रास्ते और सीमित परिवहन साधनों के बीच बीमार बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाना परिवार के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। यह स्थिति केवल एक परिवार की परेशानी नहीं, बल्कि क्षेत्र में सड़क और स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर कई सवाल खड़े करती है।
इसी क्षेत्र से एक दूसरी तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें मलेरिया से पीड़ित एक महिला अपने इलाज के लिए पैदल जाती और उपचार के बाद वापस लौटती दिखाई दे रही है। बीमारी की स्थिति में भी पैदल आने-जाने की मजबूरी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की चुनौतियों को उजागर करती है।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से सड़क, स्वास्थ्य और आवागमन जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों के लिए खराब सड़कें केवल आवागमन की समस्या नहीं हैं, बल्कि आपात स्थिति में अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने में भी बड़ी बाधा बन सकती हैं। खासतौर पर बीमार बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों के लिए समय पर इलाज तक पहुंचना बेहद महत्वपूर्ण होता है।
क्षेत्र में विकास कार्यों और बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन और सरकार की ओर से लगातार प्रयासों के दावे किए जाते रहे हैं। वहीं दूसरी ओर जमीन पर सामने आ रही ऐसी तस्वीरें यह सवाल उठाती हैं कि विकास योजनाओं का लाभ दुर्गम और दूरस्थ गांवों में रहने वाले परिवारों तक कितनी तेजी से पहुंच रहा है।
ग्रामीण इलाकों में नक्सल समस्या को लंबे समय से विकास में बाधा के प्रमुख कारणों में गिना जाता रहा है। हालांकि, मौजूदा परिस्थितियों में ग्रामीणों के सामने सड़क और स्वास्थ्य जैसी आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता का सवाल भी महत्वपूर्ण है। स्थानीय लोगों की उम्मीद है कि संबंधित विभाग इन समस्याओं का संज्ञान लेकर सड़क, परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाएंगे।
एक मां का अपने बीमार बच्चों को इलाज के लिए पैदल ले जाना क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों की मार्मिक तस्वीर पेश करता है। सवाल यही है कि विकास की योजनाओं का वास्तविक लाभ उन परिवारों तक कब पहुंचेगा, जिन्हें आज भी बेहतर सड़क और स्वास्थ्य सुविधा जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।