कबीरधाम में मलेरिया पर प्रभावी अंकुश, 10 वर्षों में एपीआई 10 से घटकर 1 हुआ
कबीरधाम जिले में मलेरिया नियंत्रण के लिए स्वास्थ्य विभाग की सघन निगरानी, घर-घर जांच, समय पर उपचार और प्रभावी मच्छर नियंत्रण गतिविधियों का सकारात्मक परिणाम सामने आया है। पिछले 10 वर्षों में जिले का वार्षिक परजीवी सूचकांक यानी एपीआई लगभग 10 से घटकर 1 के स्तर पर पहुंच गया है।
UNITED NEWS OF ASIA. कवर्धा l कबीरधाम जिले में मलेरिया नियंत्रण की दिशा में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों का असर अब आंकड़ों में भी दिखाई देने लगा है। जिले में सघन निगरानी, घर-घर मलेरिया जांच, संक्रमित मरीजों का शीघ्र उपचार और मच्छर नियंत्रण की गतिविधियों को लगातार संचालित किया जा रहा है। इन समन्वित प्रयासों के परिणामस्वरूप पिछले 10 वर्षों में जिले का वार्षिक परजीवी सूचकांक यानी एपीआई लगभग 10 से घटकर 1 के स्तर पर पहुंच गया है। इसे मलेरिया-मुक्त कबीरधाम की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
मलेरिया नियंत्रण के लिए जिले के उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों को चिन्हांकित कर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। विकासखंड बोड़ला के 113 ग्राम और सहसपुर लोहारा के 16 ग्रामों में घरों के अंदर अवशिष्ट कीटनाशक का छिड़काव कराया जा रहा है। मलेरिया संवेदनशील क्षेत्रों में लंबे समय तक प्रभावी रहने वाली कीटनाशक मच्छरदानियों का वितरण भी किया गया है। वर्तमान में जनप्रतिनिधियों के सहयोग से अति संवेदनशील ग्रामों में मच्छरदानियां वितरित की जा रही हैं। ग्रामीणों को नियमित रूप से मच्छरदानी के उपयोग के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।
मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा विशेष अभियान चलाया जा रहा है। टीमों के माध्यम से संभावित प्रजनन स्थलों की पहचान कर लार्वा स्रोत प्रबंधन की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा लार्वा नियंत्रण के लिए इंजन ऑयल की गोलियों के उपयोग जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं, जिससे मच्छरों के प्रजनन को रोकने में मदद मिल रही है।
मलेरिया की रोकथाम के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें घर-घर पहुंचकर लोगों की जांच कर रही हैं। जांच में संक्रमित पाए जाने वाले मरीजों को शीघ्र उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इस अभियान में मितानिनों और ग्रामीणों की सहभागिता भी सुनिश्चित की जा रही है। स्कूलों, आश्रमों, छात्रावासों, आंगनबाड़ी केंद्रों और सीआरपीएफ कैंपों में भी नियमित मलेरिया जांच की जा रही है। इसके लिए शिक्षा विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग तथा आदिम जाति कल्याण विभाग का सहयोग लिया जा रहा है।
दूरस्थ और पहुंचविहीन क्षेत्रों में भी मलेरिया नियंत्रण के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। इन क्षेत्रों में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। ग्रामीणों को मलेरिया से बचाव, मच्छरों से सुरक्षा, मच्छरदानी के उपयोग और समय पर जांच व उपचार के महत्व की जानकारी दी जा रही है।
मलेरिया प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी के साथ क्षेत्र स्तर पर निरीक्षण और कार्ययोजना तैयार की जा रही है। आवश्यकतानुसार केंद्रीय संस्थाओं से तकनीकी सहयोग भी लिया जा रहा है। वर्तमान में बोड़ला विकासखंड के कुछ ग्रामों में ही मलेरिया के मामले सामने आ रहे हैं, जबकि जिले के अन्य तीन विकासखंडों में मामले अपवाद स्वरूप हैं या नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार यह उपलब्धि केवल विभागीय प्रयासों का परिणाम नहीं है। इसमें मैदानी स्वास्थ्य अमले, मितानिनों, जनप्रतिनिधियों, विभिन्न विभागों और ग्रामीण समुदाय की सक्रिय सहभागिता की अहम भूमिका रही है। एपीआई का 10 से घटकर 1 होना कबीरधाम के मलेरिया नियंत्रण अभियान की महत्वपूर्ण प्रगति है। विभाग इसी निरंतरता के साथ निगरानी, जांच, उपचार और मच्छर नियंत्रण गतिविधियां जारी रखते हुए जिले को मलेरिया मुक्त बनाने की दिशा में काम कर रहा है।