जानकारी के मुताबिक घटना उस समय सामने आई जब नाबालिग छात्रा अपने घर पर पढ़ाई कर रही थी। इसी दौरान कोच की ओर से उसे व्हाट्सऐप पर संदेश भेजा गया। छात्रा ने संदेश का जवाब दिया और इस बारे में अपनी मां को भी जानकारी दी। मां के कहने पर छात्रा ने कोच से संदेश भेजने का कारण पूछा। इसके बाद कोच ने कथित तौर पर उसे जिम्नेजियम में मिलने के लिए बुलाया।
छात्रा कई वर्षों से जिम्नास्टिक का प्रशिक्षण ले रही थी, इसलिए उसे लगा कि कोच ने किसी प्रशिक्षण संबंधी काम के लिए बुलाया है। छात्रा के अनुसार जब वह जिम्नेजियम पहुंची तो वहां कोच अकेले मौजूद थे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इसके बाद कोच ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया और उसका यौन शोषण करने की कोशिश की।
छात्रा के अनुसार घटना के बाद वह वहां से जाने लगी। शिकायत में यह भी आरोप है कि कोच ने उसे घटना के बारे में किसी को नहीं बताने के लिए कहा। इसके बाद छात्रा ने मामले की जानकारी अपने परिवार को दी और पीटी शिक्षक की मदद से विले पार्ले पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई।
नाबालिग की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। चूंकि शिकायतकर्ता नाबालिग है, इसलिए कानून के तहत उसकी पहचान गोपनीय रखी जाती है। पुलिस अब शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कर रही है और घटना से जुड़े तथ्यों तथा उपलब्ध साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।
इस मामले के सामने आने के बाद खेल प्रशिक्षण संस्थानों में नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। कोच और प्रशिक्षक खिलाड़ियों के साथ लंबे समय तक काम करते हैं और ऐसे में प्रशिक्षण स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा के लिए निर्धारित नियमों का पालन बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित कोच के खिलाफ इस तरह का आरोप सामने आने से खेल जगत में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। फिलहाल पुलिस ने शिकायत के आधार पर कार्रवाई शुरू कर दी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच की जा रही है।
पुलिस जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। वहीं नाबालिग छात्रा की सुरक्षा और उसकी पहचान की गोपनीयता बनाए रखना इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है।