पश्चिम बंगाल में UCC की तैयारी तेज, दिल्ली में आज होगी ड्राफ्टिंग कमेटी की पहली बैठक

पश्चिम बंगाल में समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में प्रक्रिया शुरू हो गई है। प्रस्तावित कानून के तहत 13 अलग-अलग विवाह संबंधी कानूनों की जगह एक समान कानूनी ढांचा लाने की तैयारी बताई जा रही है। विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, बच्चों की कस्टडी और उत्तराधिकार जैसे मामलों में समान नियम लागू करने का प्रस्ताव है। अनुसूचित जनजातियों को इसके दायरे से बाहर रखने और पारंपरिक रीति-रिवाजों में हस्तक्षेप नहीं करने की बात कही गई है।

Sep 3, 2026 - 16:01
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पश्चिम बंगाल में UCC की तैयारी तेज, दिल्ली में आज होगी ड्राफ्टिंग कमेटी की पहली बैठक

UNITED NEWS OF ASIA. पश्चिम बंगाल l समान नागरिक संहिता यानी UCC लागू करने की दिशा में प्रक्रिया तेज होने की बात सामने आई है। प्रस्तावित UCC को तैयार करने के लिए ड्राफ्टिंग कमेटी की पहली बैठक आज 3 सितंबर 2026 को दिल्ली के बंगा भवन में आयोजित की जाएगी। यह बैठक सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता में होने की जानकारी दी गई है। प्रस्तावित कानूनी ढांचे को लेकर बताया जा रहा है कि पश्चिम बंगाल में अलग-अलग समुदायों के विवाह, तलाक, गुजारा भत्ता, एलिमनी, बच्चों की कस्टडी और संपत्ति के उत्तराधिकार जैसे मामलों के लिए समान नियम लागू करने की तैयारी है।

प्रस्ताव के अनुसार, राज्य में मौजूदा 13 अलग-अलग विवाह और पारिवारिक कानूनों की जगह एक समान कानून लाने की योजना है। इनमें इंडियन तलाक अधिनियम 1869, भारतीय ईसाई विवाह अधिनियम 1872, बंगाल मुस्लिम विवाह एवं तलाक पंजीकरण अधिनियम 1876, आनंद विवाह अधिनियम 1909, पारसी विवाह एवं तलाक अधिनियम 1936, आर्य विवाह मान्यता अधिनियम 1937, मुस्लिम पर्सनल लॉ यानी शरीयत आवेदन अधिनियम 1937, मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1939, विशेष विवाह अधिनियम 1954, हिंदू विवाह अधिनियम 1955, विदेशी विवाह अधिनियम 1969, मुस्लिम महिला अधिनियम 1986 और मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम 2019 शामिल बताए जा रहे हैं। प्रस्तावित व्यवस्था में इन कानूनों को बदलकर एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।

बताया जा रहा है कि नए कानून का प्रमुख आधार धर्म-तटस्थता और लैंगिक समानता होगा। इसके तहत विवाह से जुड़े नियम सभी समुदायों के लिए समान किए जाने का प्रस्ताव है। विवाह का राज्य द्वारा अधिसूचित अधिकारियों के समक्ष निर्धारित समय-सीमा में पंजीकरण अनिवार्य किए जाने की बात भी सामने आई है। इसी तरह कोर्ट के बाहर होने वाले तलाक को कानूनी मान्यता नहीं देने का प्रस्ताव बताया गया है। हालांकि, इन प्रावधानों का अंतिम स्वरूप ड्राफ्ट तैयार होने और आगे की कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।

प्रस्तावित UCC में अनुसूचित जनजातियों को दायरे से बाहर रखने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि विभिन्न समुदायों के पारंपरिक सांस्कृतिक रीति-रिवाजों, पहनावे और धार्मिक रस्मों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यानी प्रस्तावित कानून का फोकस व्यक्तिगत कानूनों से जुड़े कानूनी अधिकारों और प्रक्रियाओं को एक समान करने पर रहने की बात कही जा रही है, जबकि पारंपरिक सांस्कृतिक प्रथाओं को संरक्षण देने का दावा किया गया है।

UCC को लेकर पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बहस भी तेज हो सकती है। प्रस्तावित कानून लागू होने की स्थिति में विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे मामलों से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों में महत्वपूर्ण बदलाव आ सकते हैं। हालांकि, अभी यह प्रक्रिया ड्राफ्टिंग के शुरुआती चरण में है और अंतिम कानून का स्वरूप कमेटी की सिफारिशों तथा आगे की विधायी प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।