यह याचिका कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP की ओर से चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच सामने आई थी। याचिका में उत्तर प्रदेश और राजस्थान सरकारों द्वारा जारी उन आदेशों और सर्कुलरों को चुनौती दी गई थी, जिनमें बाहरी लोगों, पत्रकारों, यूट्यूबर्स, सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं और अन्य लोगों के स्कूल परिसर में प्रवेश को पूर्व अनुमति से जोड़ दिया गया है। इसके अलावा फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी, ऑडियो रिकॉर्डिंग, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मंगलवार को मामले की सुनवाई के दौरान याचिका को अनुच्छेद 32 के तहत स्वीकार करने से इनकार कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वकील नरेंद्र मिश्रा ने दलील दी थी कि राज्यों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध नागरिकों को संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 21-A के तहत प्राप्त अधिकारों को प्रभावित करते हैं। याचिका में यह भी तर्क दिया गया था कि स्कूलों की वास्तविक स्थिति को सामने लाने के लिए स्वतंत्र रूप से वहां की परिस्थितियों का दस्तावेजीकरण जरूरी है।
याचिका में स्कूलों में शौचालय, पीने के पानी, मिड-डे मील और बुनियादी ढांचे जैसी सुविधाओं से जुड़ी कमियों को रिकॉर्ड करने और सार्वजनिक चर्चा में लाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। इसका सीधा असर यह हुआ कि संबंधित राज्य सरकारों द्वारा लागू की गई पूर्व अनुमति की व्यवस्था को तत्काल कोई न्यायिक रोक नहीं मिली।
यह पूरा विवाद CJP के ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के दौरान सामने आए कुछ वीडियो और स्कूल परिसरों में बिना अनुमति प्रवेश से जुड़ी घटनाओं के बाद बढ़ा था। अभियान के तहत सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाओं और सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को सामने लाने का दावा किया गया था। इसी दौरान लखनऊ के एक स्कूल में यूट्यूबर्स के बिना अनुमति प्रवेश और शिक्षिकाओं पर कथित दबाव बनाने जैसी घटनाओं को लेकर भी विवाद सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश और राजस्थान में स्कूलों की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए बाहरी लोगों की गतिविधियों पर नियंत्रण के आदेश जारी किए गए।
बताया गया है कि राजस्थान में 16 अगस्त और उत्तर प्रदेश में 19 अगस्त 2026 को संबंधित आदेश जारी किए गए थे। इन आदेशों के तहत बिना अनुमति स्कूल परिसर में प्रवेश, फोटोग्राफी, इंटरव्यू और लाइव स्ट्रीमिंग जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई गई। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा रुख के बाद इन व्यवस्थाओं में तत्काल बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि, इससे संबंधित अन्य कानूनी विकल्प और भविष्य में प्रशासनिक या न्यायिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई आगे की स्थिति तय कर सकती है।